अपना स्वामी होता है परमात्मा |

- आचार्य शिवमुनि

9 August 2026

आचार्य भगवन् ने दैनिक उद्बोधन में फरमाया कि बहिरात्मा व्यक्ति आत्म ज्ञान से विमुख होता है। उसे इन्द्रियां जैसा चाहे वैसा बना देती है। वह आत्म ज्ञान को नहीं जानता।

आचार्य भगवन ने फरमाया कि परमात्मा वह है जो अपना स्वामी होता है। जो शिवमय, अनंत अक्षय है, जो सिद्ध गति चले जाते है ऐसे सिद्ध भगवान की आत्मा परमात्मा है। जो तीनों लोकों को अपने ज्ञान से देखकर-जानकर धर्म तीर्थ की स्थापना करते हैं। जो चन्द्रमा की तरह निर्मल, सूर्य से भी तेज प्रकाशवान, सागर की तरह गंभीर ऐसे सिद्ध भगवान का स्मरण एक आत्मार्थी साधक करता है।

आत्मा के आठ गुणों की चर्चा करते हुए फरमाया कि हर मनुष्य की देह में आत्मा है और यही आत्मा सिद्ध गति जाती है। जिस तरह पंखा, आदि उपकरण लाईट से चलते हैं किंतु चलाने वाली बिजली दिखाई नहीं देती है। उसी तरह मनुष्य के भीतर आत्मा है वह दिखाई नहीं देती है। आत्मा के अस्तित्व के कारण शरीर क्रियाशील रहता है। व्यक्ति यह अवलोकन करे कि दिनभर में ज्यादा चर्चा वह आत्मा की करता है या पुद्गल संसार की।

उन्होंने आत्म ध्यान पर बल देते हुए फरमाया कि हम सभी भगवान महावीर के श्रावक हैं। व्यक्ति अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करे कि वह अपनी आत्मा के लिए ध्यान को महत्त्व दे। ध्यान का क्रम हर स्थानक में चले तो वह श्रावक अपने जीवन का, अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है। व्यक्ति बहिरात्मा को छोड़कर अपने भीतर आत्मा में आने का प्रयास आत्म ध्यान के द्वारा कर सकता है।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि राग-द्वेष को मोह कहते हैं। मोह व मिथ्यात्व के कारण व्यक्ति मूढ़ हो जाता है, मूढ अर्थात जिसे किसी प्रकार का भान नहीं होता है, जैसे शराबी व्यक्ति को शराब का नशा उसे मूढ़ बना देता है। उन्होंने मोह और मूढ़ता को तोड़ने के लिए सम्यक् दर्शन यानि सत्य के ज्ञान को आवश्यक बताया।

प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा. ने ‘‘अरिहंत बनना है मुझे सिद्ध बनना है’’ मधुर गायक श्री निशांत मुनि जी म.सा. ने ‘‘इक बार तो मुख से बोल जरा अरिहंत प्रभुं-अरिहंत प्रभु’’ भजन की प्रस्तुति दी।

आचार्य भगवन के दर्शनार्थ बैंगलोर, दिल्ली, राजपुरा, सिरसा, उदयपुर, संगमनेर, मुंबई, लुधियाना आदि जगहों से सैकड़ों श्रद्धालु संघ रूप में उपस्थित हुए।
श्री ऑल इण्डिया जैन कॉन्फ्रेन्स के राष्ट्रीय वैयावच्च योजना के मंत्री श्री रतन सिंघवी, सिरसा से श्री मोहित जैन, पारस चैनल के प्रबंधक श्री हिमांशु जैन, उदयपुर से

श्री महेन्द्र पोखरना, राजपुरा से श्री राहुल जैन आदि का शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन द्वारा सम्मान किया गया।

बैंगलोर से आए विहार सेवा ग्रुप के वक्ता ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि श्री ऑल इण्डिया जैन कॉन्फ्रेन्स के तत्वावधान में विहार सेवा ग्रुप के माध्यम से कर्नाटक प्रांत के 500 श्रावक जुड़े हुए हैं। कर्नाटक प्रदेश में कहीं जैन साधु-साध्वियों की विहार सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं।

ऑनलाईन के माध्यम से तपस्या करने वाले तपस्वियों ने उपवास, एकासन, आयंबिल का प्रत्याख्यान लिया।

आत्म भवन में प्रतिदिन प्रातः 6.15 से 7.15 आत्म ध्यान, प्रातः 9.30 से 10.30 स्वाध्याय, ध्यान एवं मंगल पाठ होगा। आप सभी लाभ लेकर अपन जीवन कृतार्थ करें।

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