आत्मा से परमात्मा मिलन की ध्वनि है सोह्म |

- आचार्य शिवमुनि

20 August 2026

आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने आचार्य पूज्यपाद कृत समाधि तंत्र की चर्चा में फरमाया कि आत्मा का गुण अनंत सुख है जिसे वह छोड़ नहीं सकती और पुद्गल जो ग्रहण करने योग्य नहीं है वह ग्रहण नहीं करती है यह आत्मा का गुण है। शरीर को आत्मा समझना भ्रम है।

उन्होंने ‘सोह्म’ ध्यान की चर्चा करते हुए फरमाया कि सोह्म की साधना गहरी साधना है, सोह्म की साधना से व्यक्ति को जातिस्मरण ज्ञान, अवधिज्ञान भी हो सकता है। सो वह मैं आत्मा जो अरिहंतों, सिद्धों में सभी में समान आत्मा है। सोह्म आत्मा से परमात्मा मिलन की ध्वनि है।

शरीर को अपना माना तो व्यक्तित्व बड़ा हो गया जिससे संसार बढ़ गया। राजा-महाराज के पास सब कुछ था। लड़ाई करते-करते मर गए किंतु साथ में कोई कुछ लेकर गए नहीं।

प्रमुखमंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि धर्म, अनुप्रेक्षा, गुप्ति, समिति, धर्म, अनुप्रेक्षा इन कारणों से संवर होता है और संवर मोक्ष की ओर ले जाता है।

प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा. ‘‘जो गम किसी को हमने दिये वो गम तो हमको लेने पड़ेंगे’’ भजन की प्रस्तुति दी।
ऑनलाईन के माध्यम से उपवास, एकासन, आयंबिल का तप करने वाले तपस्वियों ने प्रत्याख्यान लिये।

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