भारतीय धर्मों में मोक्ष की अवधारणा पर शोध करते हुए मैंने जाना कि सब धर्मों में कॉमन है – ध्यान । तीस वर्षों की मेरी ध्यान साधना का सार है- “ आत्म ध्यान ” । यह कम्प्यूटर के डिलीट बटन की तरह साधक के मन मानस से गैरजरूरी यादें, संस्मरण, नकारात्मकता डिलीट कर देता है। अंतर्मन शांत, शुद्ध और सात्विक हो जाने से आत्म ध्यान का साधक सकारात्मक सोचने लगता है।
- आत्म ध्यान करें व जाने :
मैं कौन हूँ ? जीवन क्या है ? मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है ?
ध्यान गुरु आचार्य श्री डॉ. शिवमुनि (डी.लिट्)
- परम पावन सानिध्य :
ध्यान गुरु आचार्य सम्राट पूज्य डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा.
संचालक: आत्मयोगी श्री शिरीष मुनि जी म.सा.
- शिविर एव् चातुर्मास स्थल :
श्री वर्धमान श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन सकल संघ,
वर्धमान सांस्कृतिक भवन गंगाधाम- कोंढवा रोड, बिबवेवाडी
आशापुरामाता मंदिर के नजदीक, पुणे – 411 037