अन्याय अनीति से कमाया हुआ धन स्थायी नहीं रहता |

- आचार्य शिवमुनि

30 OCTOBER 2025

श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में आयोजित ऑनलाईन आत्म ध्यान धर्म यज्ञ के छठे दिवस पर आचार्य भगवन ने आत्म ध्यान का प्रयोग करवाया।

इससे पूर्व प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने फरमाया कि जो साधक धु्रवचारी है वह सिद्धशिला के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता हैं। जो व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र में फंसा है, मृत्यु से भयभीत रहता है कि कहीं मेरी मौत न हो जाए। धु्रवचारी साधक जन्म को केवल पड़ाव मानता है।
उन्होंने आगे फरमाया कि सभी प्राणियों को अपना जीवन प्रिय है। जो शरीर मिला है उसी में रहकर जीना चाहते हैं, सभी प्राणी सुख चाहते हैं, कोई भी प्राणी दुःख नहीं चाहता। मनुष्य अपने जीवन की सुख-सुविधा के लिए धन इकट्ठा करता है और ऐशो आराम के लिए खर्च करता है। एक उम्र के बाद एकत्रित किया हुआ शेष धन रह जाता है तो उसके प्रति आर्त्त-रौद्र ध्यान बना रहता है।

उन्होंने यह भी फरमाया कि अन्याय अनिति से इकट्ठे किए हुए धन के कारण व्यक्ति में चोरी का भय बन रहता है, जो मानसिक रूप से तनाव पैदा करता है और उससे व्यक्ति मूढ बन जाता है। बचा हुआ धन ही उसके दुःख का कारण बनता है और वह आर्त-रौद्र ध्यान में रहता है। अज्ञानी जीव मूढ़ होकर जीवन भर दुःखी होने वाले कर्म करता है और विकल्पता से मूढ़ होकर मरता है। अन्याय-अनिति से एकत्रित किया हुआ धन कभी न कभी नष्ट होता है स्थायी नहीं रह सकता है।

आत्मार्थी साधक स्व आत्मा का चिंतन करता है कि आत्मा के अलाव मेरा कुछ नहीं, सारे कर्मों को क्षय करके ही मैं सुखी होऊंगा जिसे यह भाव बोध हो जाएगा वह स्व तीर्थी है। सम्यक ज्ञान चारित्र वाला साधक तीर्थ में जीने वाला होता है। जो आत्मार्थी है वह अपने स्वरूप को जानता है। वह पुद्गलों में सुख नहीं ढूंढता है, एक भी पुद्गल को अपना नहीं मानता है। वह भगवान की आज्ञा में चलता है। पुद्गलों में सुख मानने वाला व्यक्ति चौबीस घंटे पद प्रतिष्ठा में उलझा रहता है।

मधुर गायक श्री निशांत मुनि जी म.सा. ने ‘‘आंखों में हो आंसू और होठों पर हो नाम, क्यों नहीं आएंगे भगवान’’ भजन की प्रस्तुति देते हुए अपना उद्बोधन दिया।

उपप्रवर्तक श्री नरेश मुनि जी म.सा. की निश्राय में अध्ययनरत बैंगलोर से वैरागी लवेश सिंघवी अचार्य भगवन के दर्शन हेतु उपस्थित हुए, जिनकी दीक्षा 25 जनवरी

2026 को बैंगलोर श्रीसंघ में होगी। वैरागी का अवध श्रीसंघ द्वारा सम्मान किया गया।

इस अवसर पर पूना, भीलवाड़ा, बैंगलोर आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शनार्थ उपस्थित हुए।

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