सभी धर्मों में आत्मा की बात कही गई है |

- आचार्य शिवमुनि

30 SEPTEMBER 2025

आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में जीव के अस्तित्व की चर्चा करते हुए फरमाया कि प्रायोगिक स्तर पर जिस तरह एक पत्र के उपर सही और पूरा पता नहीं लिखा होने से वह पत्र जहां पहुंचना चाहिए वहां नहीं पहुंच पाता है और पुनः भेजने वाले के पास ही आ जाता है। उसी प्रकार मनुष्य को अपने अस्तित्व आत्मा का बोध नहीं होने से वह अनेक बार भव भ्रमण में चक्र लगाता है। जिसे अपने अस्तित्व का बोध हो जाता है वह इस भव को पार कर लेता है।

आचार्य श्री जी ने आगे फरमाया कि जो अरिहंत परमात्मा के रास्ते पर चलते हैं, वे गुरु होते हैं और गुरु ही अस्तित्व का बोध करवाते हैं। हम सभी को भी वहीं जाना है जहां अरिहंत देव गए हैं, जो अरिहंत परमात्मा ने मार्ग लिया वही मार्ग हमें लेना है।

उन्होंने आत्मा के आठ गुणों की चर्चा के साथ फरमाया कि जैन, बौद्ध, हिन्दू, ईसाई सभी धर्मों में आत्मा की बात कही गई है किंतु कुछ लोग ही उसे ग्रहण करते हैं। व्यवहारिक दृष्टि से माता-पिता अपने बच्चे के जन्म के साथ उसके शरीर का नामकरण कर देते हैं, उसे वह नाम जीवन भर याद रहता है, उसी प्रकार यदि व्यक्ति निश्चय में अपनी आत्मा को याद रखे, हर क्रिया-प्रतिक्रिया में अपनी आत्मा में स्थित रहे तो वह निश्चित रूप से मोक्ष को प्राप्त करता है।

प्रमुखमंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि सम्यक दृष्टि वाला साधक बंधनों से मुक्त रहता है। वह किसी के मोह के चक्र में फंसना नहीं है और जितना कर्म क्षय करता है उतना ही वह आगे बढ़ जाता है। जो साधु बन जाता है वह अठारह पापों से दूर रहता है।

युवामनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘जय महावीर-जय महावीर, त्रिशलानन्दन जय महावीर’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर दिल्ली, उदयपुर, बैंगलोर, चालीसगांव के श्रद्धालु गुरुदर्शन हेतु उपस्थित हुए।

विशेष – 21 दिवसीय अनुष्ठान का शुभारम्भ 2 अक्टूबर 2025 से : भगवान महावीर की अंतिम देशना श्री उत्तराध्ययन सूत्र का वांचन 2 अक्टूबर 2025 से शुभारम्भ होने जा रहा है, जिसका वांचन प्रातः 8.30 बजे से युवामनीषी श्री शुभममुनि जी के मुखारविंद से होगा।

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