अस्तित्व का ध्यान है आत्म ध्यान |

- आचार्य शिवमुनि

16 SEPTEMBER 2025

श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कोन्फ्रेंस, नई दिल्ली के तत्वावधान में आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के 84वें प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय आत्म-ध्यान प्रचार-प्रसार योजना के अंतर्गत आत्म-ध्यान धर्म यज्ञ का आयोजन किया गया। दिनांक 16 सितम्बर 2025 मंगलवार को प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक 3 घंटे के इस आत्म ध्यान साधना शिविर में देश-विदेश में हजारों साधक-साधिकाएं सहभागी बने।

इस विश्व ध्यान दिवस पर आयोजित धर्म यज्ञ में अमेरिका, दुबई, कनाडा, थाईलेण्ड, भारत के 11 राज्यों सहित 150 से अधिक सेंटरों पर साधना की गई। जिसमें हजारों साधक आत्म ध्यान से लाभान्वित हुए।

ज्ञातव्य है कि आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा का 18 सितम्बर 2025 को 84वां प्रकाशोत्सव है, इस अवसर पर तीन दिवसीय विशेष आयोजन किया गया है, जिसके अंतर्गत ध्यान साधना, भक्ति संध्या एकासन, आयंबिल आदि के माध्यम से मनाने का लक्ष्य निर्धारित है।

आचार्य श्री जी ने आत्म ध्यान धर्म यज्ञ में फरमाया कि यह ध्यान अपने अस्तित्व का है व्यक्तित्व का नहीं। व्यक्तित्व से अलग अस्तित्व का ध्यान है आत्म ध्यान। व्यक्ति के मन में पांचों इन्द्रियों के विषय के कारण अनेक विचार आते है। जब विचार आए तो केवल दृष्टा भाव से जानें, दृष्टा भाव से विचार अलग हो जाते हैं। इस ध्यान साधना में भूत भविष्य में नहीं वर्तमान क्षण में रहना है। आत्मा को केन्द्र बिन्दु बनाने से साधक आत्म साधना में आगे बढ़ जाता है।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने शरीर को युवा और स्वस्थ रखने की विधि बताते हुए यौवन तत्व की यौगिक क्रियाएं करवाई। साथ ही उन्होंने फरमाया कि ध्यान की एकाग्रता के लिए आते-जाते श्वांस को देखने का आलम्बन लेना चाहिए, जब एकाग्रता सध जाती है तो फिर श्वांस के आलम्बन की आवश्यकता नहीं होती। शुक्ल ध्यान में केवल आत्मा के अलावा कोई ध्यान नहीं आता है।

वीतराग साधिका निशाजी ने शुक्ल ध्यान के विशेष प्रयोग करवाते हुए सभी साधकों को अरिहंत परमात्मा सीमंधर स्वामी भगवान की साधना से आत्मसात करवाया एवं कर्म निर्जरा की उत्कृष्ट साधना विधि करवाई। जन्मों-जन्मों के पाप कर्मों को क्षय करने के लिए आलोचना एवं प्रतिक्रमण भी करवाया। अंत में आचार्यश्री जी ने मंगल मैत्री करते हुए सबके लिए मंगल की भावना व्यक्त की और फरमाया कि हम सभी आत्माएं एक समान हैं।

श्री ऑल इंडिया श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कोन्फ्रेंस आत्म-ध्यान प्रचार-प्रसार योजना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शशिकान्त (पिन्टू) कर्णावट ने अपनी राष्ट्रीय स्तर पर इस आयोजन का सारा श्रेय आचार्य श्री जी के आशीर्वाद एवं साधु-साध्वीवृदं के सक्रिय सहयोग के लिए कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि जैन कॉन्फ्रेन्स एवं प्रचार प्रसार योजना के सभी पदाधिकारी, कार्यकर्त्ताओं के सहयोग से आत्म ध्यान धर्म यज्ञ सम्पन्न हुआ, मैं उनके प्रति हार्दिक कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं। जैन कॉन्फ्रेन्स के राष्ट्रीय महामंत्री श्री अमितराय जैन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अतूल जैन के दिशा निर्देशन में चल रहे ध्यान साधना शिविर की सराहना करते हुए आचार्य भगवन, वीतराग साधिका निशाजी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।

आज पंजाब, महाराष्ट्र, दिल्ली आदि अनेक क्षेत्रों से श्रद्धालु गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हुए।

राजाजी नगर बैंगलोर से आचार्य भगवन के प्रकाशोत्सव पर मासखमण तप के अंतर्गत श्री सम्पतमल कोठारी 28 उपवास, श्री विशाल गांधी 29 उपवास का प्रत्याख्यान ऑनलाईन के माध्यम से लिया।

विशेष – आचार्य भगवन के त्रिदिवसीय 84वें प्रकाशोत्सव के अंतर्गत 17 सितम्बर 2025 को लब्धि पार्श्वनाथ तीर्थ धाम भक्ति संध्या का आयोजन होगा, जिसमें प्रसिद्ध भजन गायक श्री वैभव बाघमार अपनी प्रस्तुति देंगे। 18 सितम्बर 2025 को एकासन, आयंबिल आदि तप के माध्यम से मनाया जाएगा। लब्धि पार्श्वनाथ तीर्थ धाम में 18 सितम्बर को प्रातः 9 बजे से प्रकाशोत्सव का कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर दूर-दूर से अनेक श्रद्धालुगण आचार्य भगवन के दर्शन हेतु उपस्थित होंगे।

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