कर्म क्षय का सर्वोत्तम साधन है ध्यान |

- आचार्य शिवमुनि

26 AUGUST 2025

आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने पर्युषण पर्व के सातवें दिन अवध संगरीला के बेंक्विट हॉल में उपस्थित धर्म सभा में फरमाया कि ध्यान में प्रवेश करते समय न भूतलकाल का और न ही भविष्यकाल का चिंतन करना चाहिए। वर्तमान में जीना ही सर्वोत्तम ध्यान है। यदि सहज में विचार आ जाए तो उन्हें महत्त्व नहीं दें। कर्म क्षय के लिए ध्यान के प्रयोग किये जाते हैं।

आचार्य भगवन ने आगे फरमाया कि यदि शरीर पर भारी कर्म निकलते हैं तो असहाय वेदना होती है तो उस समय शरीर और जीव का भेद कर दें कि कष्ट शरीर को हो रहा है मुझ आत्मा को नहीं। किसी मंत्र तंत्र का सहारा लेकर कर्मों को दबाना नहीं चाहिए। जो कर्म उदय में आये हैं उन्हें क्षय करो। कर्म आए तो आर्त्त-रौद्र ध्यान नहीं करना चाहिए।

आचार्य भगवन ने यह भी फरमाया कि व्यक्ति को वर्तमान स्थिति में रहने के लिए वर्तमान क्षण को देखे और जाने भूत-भविष्य में नहीं जाना चाहिए। श्वांस का आलंबन लें और उसके पश्चात् ‘सोऽहं’ को श्वांस के साथ जोड़ने से संकल्प-विकल्प नहीं आएंगे और मन स्थिर हो जाएगा और इस स्थिति में जब स्थिरता आ जाती है तो महान कर्मों की निर्जरा होती है। संसार के सारे संकल्प-विकल्प को छोड़ कर जीवन पर्यंत अपने स्वरूप अर्थात् आत्मा में स्थित रहने का संकल्प लें तो आत्मा का कल्याण अवश्य होगा।

आचार्य भगवन ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को प्रेरणा प्रदान करते हुए फरमाया कि संवत्सरी महापर्व पर सभी अपने प्रतिष्ठान बंद कर संवत्सरी के अंतिम दिन अधिक से अधिक प्रवचन, प्रतिक्रमण, उपवास, पौषध, प्रायश्चित, आलोचना जरूर करें इससे कर्मों की निर्जरा होगी।

युवामनिषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने श्री अंतकृत दशांग सूत्र में अतिमुक्तक कुमार के संसारी जीवन व साधु के जीवन का रोचक प्रसंग सुनाया।

धर्म सभा के प्रारंभ में प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा. ने श्री अंतकृतदशांग सूत्र का मूल वांचन किया।

आत्म भवन में प्रात 7.00 बजे वीतराग साधिका निशाजी ने शुक्ल ध्यान के प्रयोग के द्वारा अरिहंत प्रभु की वाणी में फरमाया आत्मा में स्थिर हो जाओ। शून्य में पहुंच उस सुख का अनुभव करें, जिस सुख का अनुभव केवली भगवान कर रहे हैं। यह अनुभव भीतर वैराग्य दशा को प्राप्त करेगा।

आज श्री मुकेश लोढ़ा, श्री नटवरलाल कोठारी ने 25 उपवास, सुश्री गुंजन दिनेश कोठारी 9 उपवास, श्रीमती रेणू जैन 4 उपवास, अम्बाला से शिवानी जैन 10 उपवास, भीलवाड़ा से चंचल बहन व सोलन से श्री राहूल जैन ने 7 उपवास, दस वर्षीय जेनिश दिनेश पोरवाल ने तेला आदि अनेक तपस्वियों ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाईन के माध्यम से प्रत्याख्यान लिये। उपस्थित तपस्वियों का शॉल, माला, स्मृति चिन्ह द्वारा शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से सम्मान किया गया।
पर्युषण पर्व के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जैनाचार्यजी यू-ट्यूब चैनल पर किया जा रहा है।

शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अशोक मेहता ने बाहर से आए हुए अतिथियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।

आज की प्रभावना श्री अशोक मेहता, श्री अजीत कटारिया, श्री कैलाश डांगी की ओर से थी।

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