निज यात्रा का अवलोकन करें |

- आचार्य शिवमुनि

24 AUGUST 2025

आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने पर्युषण पर्व के पांचवे दिन अवध संगरीला के बेंक्विट हॉल में उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि आज महापर्व पर्युषण का पांचवा दिन पंच परमेष्ठी, मंगलकारी है। अरिहंत परमात्मा जो लाखों लोगों को मोक्ष का मार्ग बता रहे हैं। पर्युषण पर्व के दिनों में नियमित जो अरिहंत परमात्मा की वाणी श्रवण करने का अवसर मिल रहा है वे सभी सौभाग्यशाली हैं अगर इस वाणी को अंतरात्मा में उतार लिया तो निश्चित ही मोक्ष की ओर बढ़ सकते हैं।

आचार्य श्री जी ने आगे फरमाया कि आज प्रभु की वाणी में निज यात्रा के अवलोकन की वाणी आई। निज यानि आत्मा जो चेतन है निराकार अवस्था है उसका अवलोकन करना। संसार चक्र को देखें तो इस जीव ने कभी मनुष्य, कभी देव, कभी तिर्यंच, कभी नरक ऐसे अनेक भवों की यात्रा की। कर्म बीज के कारण मनुष्य भव में धन वैभव सुख संपदा आ गई, पाप किया तो नरकों में गया इस प्रकार यह संसार चक्र चलता रहता है, इस चक्र को समाप्त करना है। संसार को विचारने से, संसार को समय देने से यह जीव संसार के बंधनों से अब तक मुक्त नहीं हुआ। जो आत्मार्थी है वह किसी की निन्दा-विकथा, अनावश्चक चर्चा नहीं करता वह अपने आत्म स्वरूप में, वर्तमान क्षण में रहता है, आर्त्त-रौद्र ध्यान से दूर रहता है। किसी से कोई शिकायता नहीं, मित्थ्यात्वियों से किनारा कर लेता है वह व्यक्ति इस संसार सागर से मुक्त हो जाता है।

आचार्य भगवन ने अभय दान को श्रेष्ठ दान बताते हुए फरमाया कि एक आत्म ज्योति से अनंत जीवों का कल्याण होता है। किसी भी प्राणी को कष्ट नहीं पहुंचाना अभय दान है और तपों में ब्रह्मचर्य सर्वश्रेष्ठ तप है।

युवामनिषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने श्री अंतकृत दशांग सूत्र में गजसुकुमाल के पूर्व भव का रोचक वर्णन सुनाया।

धर्म सभा के प्रारंभ में प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी ने श्री अंतकृतदशांग सूत्र का मूल वांचन किया।

आत्म भवन में प्रात 7.00 बजे वीतराग साधिका निशाजी ने शुक्ल ध्यान के प्रयोग के द्वारा अरिहंत प्रभु की वाणी में फरमाया कि इस जीव ने कहां-कहां यात्रा नहीं की, कर्म का बंधन कभी किसी रूप में बांधा तो कभी किसी रूप में, अब इस जीव पर करुणा कर, सारे परिचय गौण कर, स्वयं को केन्द्र बिन्दू बना कि मैं मात्र जीवात्मा हूं।

इस अवसर पर आज गुजरात सरकार के डी.आई.जी, आर.पी. बारोट आचार्य भगवन के दर्शन हेतु उपस्थित हुए जिनका शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर माला, शॉल, साहित्य द्वारा सम्मान किया गया।

तपस्या में आज श्री अनिल मेहता, श्रीमती रोमिका मेहता, श्री प्रवीण माण्डोत, श्री शौकिन पोखरना ने पांच दिन के उपवास का प्रत्याख्यान लिया।

पर्युषण पर्व के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जैनाचार्यजी यू-ट्यूब चैनल पर किया जा रहा है।

आज की प्रभावना श्री रमेश भाई बोकड़िया एवं गुप्तदानी परिवार की तरफ से थी।

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