मन के भटकाव से बचने के लिए श्वांस का आलंबन लें |

- आचार्य शिवमुनि

14 AUGUST 2025

आज ध्यान गुरु आचार्य सम्राट पूज्य श्री डॉ. शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में सूरत से सीधे प्रसारण के द्वारा एक दिवसीय एवं चार दिवसीय आत्म ध्यान धर्म यज्ञ शुभारंभ नाशिक ध्यान केन्द्र एवं आदीश्वर धाम कुप्पकलां (पंजाब) में हुआ। धर्मयज्ञ में आत्मार्थी साधक आत्म ज्ञान को प्राप्त करते हुए आत्म साक्षात्कार की ओर बढ़ रहे हैं।

आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में आत्मार्थी साधकों को संबोधित करते हुए फरमाया कि आत्मार्थी को यह जानना आवश्यक है कि मैं कौन हूं? कहां से आया हूं? इस जीव ने अनेक यात्राएं की, धर्म की क्रियाएं की, किंतु इस चार गति चौरासी लाख जीवायोनि का अंत क्यों नहीं हो रहा है? इस तरह का प्रश्न एक आत्मार्थी साधक के मन में अवश्य आता होगा? जन्म मरण के बंधन से मुक्त होने के लिए आत्मा में स्थित होने का प्रयास करें। आत्म ध्यान करने वाला साधक अपने मन को मौन कर लेता है। वह न भविष्य की चिंता करता है और न भूतकाल का चिंतन करता है, वह वर्तमान क्षण में स्थित रहने का पुरुषार्थ है।

उन्होंने आगे फरमाया कि मन के भटकाव से बचने के लिए, वर्तमान क्षण में स्थित रहने के लिए आते-जाते श्वांस को देखने का अभ्यास करें, इससे एक आलंबन मिल जाता है जो ध्यान के लिए जरूरी है। श्वांस और शरीर का गहरा नाता है। शरीर का अस्तित्व श्वांस पर टिका हुआ है। व्यक्ति जब क्रोध करता है, दौड़ लगाता है तो श्वांस की स्थिति बदल जाती है, इसलिए ध्यान में पहला आलंबन श्वांस का लेते हैं। श्वांस एक सेतू है जब कभी क्रोध आए, अहंकार आए तो उस समय आते-जाते श्वांस को देखें।

इस अवसर पर आचार्य भगवन ने ‘‘सोह्म’’ ध्यान के प्रयोग के द्वारा आत्मार्थी साधकों को लाभान्तिव किया और अनेक आत्मार्थी साधकों की जिज्ञासा का समाधान किया।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि पृथ्वी पर ऐसा कोई जीव नहीं है जो ध्यान नहीं करता है। दिन-रात चौबीसों घंटे ध्यान चलता रहता है जिसमें चार प्रकार के ध्यान हैं दो पुद्गल के ध्यान हैं और दो आत्मा के ध्यान हैं। पुद्गल का ध्यान जिसमें व्यक्ति का कर्त्ता भोक्ता का भाव होता है। आत्मा के ध्यान में जब शरीर पर कष्ट आए तो उस समय यह विचार करें कि कष्ट आया है वह शरीर को आया है और ये पुराने कर्म शरीर पर निकल कर आए हैं।

युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘हे प्रभु चरणों में तेरे आ गए’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।

कामरेज से सुश्री निधि पींटू जी कोठारी ने 10 दिन के उपवास का प्रत्याख्यान लिया, श्री वर्द्धमान स्थाकवासी कामरेज महिला मण्डल अध्यक्षा श्रीमती पिंकी संतोष जी कोठारी ने 36 आयंबिल का प्रत्याख्यान लिया, दोनों तपस्वियों को शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से मोमेन्टा, शॉल, माला द्वारा सम्मान किया।

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