मनुष्य और वनस्पतिकाय के जीव समान है |

- आचार्य शिवमुनि

13 AUGUST 2025

आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि व्यक्ति के भीतर भाव प्रतिपल प्रतिक्षण आते रहते हैं वे उदय के भाव होते हैं। जैसे दुषित पानी है उसमें धीरे-धीरे गंदगी नीचे बैठ जाती है उसी तरह क्षायोपशमिक भाव कुछ क्षय हो जाते हैं कुछ रह जाते हैं। जब व्यक्ति भाव से विभाव में जाता है तो संसार में परिभ्रमण करने लग जाता है।

उन्होंने आगे फरमाया कि ‘सोह्म’ की साधना करने वाला साधक सबमें समान आत्मा देखता है। जो सिद्धों, अरिहंतों, उपाध्याय, आचार्य, साधु में आत्मा है वही आत्मा सबमें है और वह सबमें अपना स्वरूप देखता है।

उन्होंने आगे वनस्पति जगत और मनुष्य जगत की समानता का उल्लेख करते हुए फरमाया कि वनस्पतिकाय में भी मनुष्य की तरह जीव होता हैं। मनुष्य जगत और वनस्पति जगत एक समान है। जैसे मनुष्य का जन्म होता है वनस्पति भी जन्म लेती है। जिस तरह भूमि में बीज डालने पर वह धीरे-धीरे भूमि की ऊष्मा, खाद, पानी, हवा से बढ़ता है, बढ़कर तना बनता है, वृक्ष बनता है उसी प्रकार मनुष्य भोजन, पानी, हवा को ग्रहण करता है वह वनस्पति की तरह बढ़ता है। वनस्पति की भांति मनुष्य का भी पर्याय बदलता रहता है। जिस तरह वृक्ष को काटने पर वह मुरझा जाता है वैसी ही स्थिति मनुष्य की हो जाती है। यह बात भगवान महावीर ने अपने केवल ज्ञान में हजारों वर्ष पूर्व कही थी। आज के वैज्ञानिक भी इस बात को सिद्ध करते हैं। जगदीशचन्द्र बसु ने वनस्पति में जीव है इसे सिद्ध किया था।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में विनय को मूल बताते हुए फरमाया कि सम्पूर्ण धर्म का मूल विनय है। बीज मूल से स्कंध की उत्पति होती है। स्कंध से शाखाएं उत्पन्न होती है, शाखाओं से अन्य शाखाएं निकलती है, पत्ते, पुष्प, फल और फिर रस की उत्पति होती है। एक बीज के मूल से कई बीज उत्पन्न होते है। कोई भी वस्तु का मूल धु्रव उसका बीज होता है। व्यक्ति पर्याय को देखते हैं, धु्रव को नहीं। शाखाओं का मूल बीज है उसी प्रकार धर्म का मूल विनय है। विनय रूपी धर्म परम उत्कृष्ट है।

युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘यह शाश्वत सुख का प्याला कोई पीयेगा अनुभव वाला’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।

उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने ऑनलाईन के माध्यम से अपनी धारणा के अनुसार उपवास, एकासन, आयंबिल आदि का प्रत्याख्यान लिया।

विशेष – एक दिवसीय एवं चार दिवसीय ऑनलाईन आत्म ध्यान साधना शिविर गुरुवार 14 अगस्त 2025 से नाशिक ध्यान केन्द्र एवं आदीश्वर धाम कुप्पकलां (पंजाब) ध्यान केन्द्र पर प्रारंभ होगा। आत्मार्थी साधक इस ऑनलाईन शिविर का निःशुल्क लाभ प्राप्त कर सकेंगे

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