भूमि छेदन की अनावश्यक हिंसा नहीं करें |

21 JULY 2025

आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने आज के उद्बोधन में फरमाया कि सभी पृथ्वीकाय के जीव अपने-अपने शरीर में रहते हैं। पृथ्वीकाय के जीव भूमि के नीचे असंख्य रहते हैं। जब व्यक्ति भवन निर्माण के लिए मारबल, पत्थर खोदता है तो उसमें उन जीवों की हिंसा होती है। एक गृहस्थ व्यक्ति को अपनी आवश्यकता पूर्ति के लिए हिंसा करनी पड़ती है किंतु बड़े स्तर पर भूमि का छेदन-भेदन करना अनेक भवनों का निर्माण कर धन कमाने के लिए भवनों को बेचना यह सब अनावश्यक हिंसा है। शास्त्रकार के अनुसार कहा गया है कि एक व्यक्ति जो बोल नहीं सकता, सुन नहीं सकता, देख नहीं सकता यदि उसे मारा-पिटा जाये तो वह अपना दर्द बता नहीं सकता उसी प्रकार पृथ्वीकाय के जीव अपना दुःख बता नहीं सकते, इसलिए भूमि छेदन की अनावश्यक हिंसा से बचने का प्रयास एक श्रावक को करना चाहिए। उन्होंने आगे छह काय के जीवों की चर्चा करते हुए फरमाया कि पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु, वनस्पितिकाय जीवों की हिंसा से बचने का प्रचास करना चाहिए।

उन्होंने व्यक्ति के जीवन में कृतज्ञता के भाव को आवश्यक बताते हुए फरमाया कि एक धार्मिक व्यक्ति का लक्षण होता है कि जब वह दूसरे व्यक्ति की सहायता या उपकार करता है तो वह अपने द्वारा किये गये उपकार का बखान नहीं करता किसी को बताता नहीं है, जब उसके लिए कोई दूसरा व्यक्ति उपकार करता है तो उस उपकार को भूलता नहीं है।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने 10 दिवसीय शिविर के अंतिम दिन अपने उद्बोधन में फरमाया कि हम सभी आत्म ध्यान धर्म यज्ञ के 10वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं और धर्म के शुद्ध स्वरूप को आत्मसात कर रहे हैं। धर्म की चर्चा, वार्ता, स्वाध्याय में चिंतन मनन होता है, लेकिन आत्म ध्यान द्वारा ही उसे आत्मसात किया जाता है। ध्यान के द्वारा साधक पाप रहित भाव के साथ तप के द्वारा पूर्व जन्म के कर्मों को क्षीण करता है।

युवा मनिषी मधुर गायक श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘अरिहंत देव मेरी सुुनीये पुकार अगला भव मिले तेरे दरबार’’ समधुर भजन की प्रस्तुति दी।
ऑनलाईन के माध्यम से मुंबई के 16 वर्षीय नमन हितेश मेहता ने 13 उपवास का प्रत्याख्यान लिया। चलथान से श्रीमती मनीषा संचेती ने 3 दिन के उपवास का प्रत्याख्यान लिया।

विशेष – श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट आनन्दऋषि जी म.सा. की 126वीं जन्म जयन्ती 25 जुलाई 2025 को है, जन्म जयन्ती के अवसर देशभर के श्रावक-श्राविकाएं सामुहिक रूप से दिनांक 23 से 25 जुलाई को तेला तप की आराधना अवश्य करें।

- आचार्य शिवमुनि

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