

में फरमाया कि कीचड़ में कमल खिलता है वह कीचड़ से अलग रहता है, फूल में खुशबू है, दूध में मक्खन है पर वह दिखाई नहीं देता। एक प्रक्रिया के द्वारा दूध से मक्खन को निकाला जाता है वैसे ही ध्यान के द्वारा मनुष्य शरीर और आत्मा के भेद को जान सकता है। अज्ञान व मोह के कारण मनुष्य को अपने ज्ञान दर्शन का पता नहीं चलता वह स्व मति के द्वारा, जाति स्मरण ज्ञान के द्वारा, तीर्थंकर भगवान के उपदेश से या किसी विशिष्ट ज्ञान से जान लेता है कि मैं आत्मा हूं और मुझे सिद्धालय जाना है ।
आचार्य भगवन् ने आगे फरमाया कि व्यक्ति जन्म के निमित कर्मों का आश्रव करता है, परलोक में अच्छा जन्म मिलेगा इसलिए जल समाधि ले लेता है, पहले सति प्रथा होती थी पति मर जाता तो पत्नी को साथ में जलाते थे कि इसे पुनः यही पति मिलेगा इस प्रकार यह सब जन्म-मरण के कारण पाप करते हैं। जब किसी व्यक्ति को व्यापार में घाटा हो जाता है या कोई विद्यार्थी परीक्षा में फेल हो जाता तो वह आत्म हत्या की बात सोचता है कि मैं मर जाऊं। वह यह सोचे कि मेरे पूर्व के कर्म के कारण है ऐसा हुआ है किसी को दोष मत देना। संयोग-वियोग सुख दुःख स्थायी नहीं है ये जीवन में आते रहते हैं इसलिए कभी भी निराश होकर जीवन में आत्म हत्या की बात नहीं सोचनी चाहिए। आत्म हत्या से अनेक जन्मों के पाप कर्मों का बंधन होता है।
उन्होंने आगे फरमाया कि जैन दर्शन का पहला सिद्धांत है भेद विज्ञान, दूसरा है कर्म सिद्धांत, जो भी मिला है वह कर्म के अनुसार मिला है। कर्म को स्वीकार करें। तीसरा सिद्धांत है अनेकांतवाद, अपना आग्रह मत रखो कि जो मैं कहता हूं वही ठीक है। जैन दर्शन अनेकांतवादी है, ये तीन बातें जीवन में आती है तो जीवन में दुःख नहीं आता है।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने फरमाया कि व्यक्ति को स्वयं का बोध नहीं होने से वह संसार में परिभ्रमण करता रहता है सद्गुरु ही मोह की पट्टी हटाकर जगाते हैं। जो मोह की नींद में है वह जागता हुआ भी सोया हुआ है। पुद्गल में लिप्त व्यक्ति ही संसार में परिभ्रमण करता है। अनादि काल से इसी मिथ्यात्व में यह जीव आत्मा चार गतियों में परिभ्रमण कर रही है।
युवा मनिषी मधुर गायक श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘क्या है मेरा स्वरूप कभी मैंने इस पर किया विचार नहीं’’ समधुर भजन की प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर ऑनलाईन के माध्यम से मुंबई के 16 वर्षीय नमन हितेश मेहता ने 10 उपवास का प्रत्याख्यान लिया। साथ ही अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने अपनी धारणा अनुसार त्याग-प्रत्याख्यान लिये।
आज की सभा में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् चलथान के कार्यकारीणी सदस्यों ने उपस्थित होकर आगामी 17 सितम्बर 2025 को मेगा ब्लड डॉनेशन केम्प के बेनर का विमोचन आचार्य भगवन् के सान्निध्य में करवाया और अपनी भावनाएं व्यक्त की।
आज की धर्म सभा में राजपुरा, लुधियाना, दिल्ली आदि क्षेत्रों से श्रद्धालुगण उपस्थित हुए।
भारतीय धर्मों में मोक्ष की अवधारणा पर शोध करते हुए मैंने जाना कि सब धर्मों में कॉमन है – ध्यान । तीस वर्षों की मेरी ध्यान साधना का सार है- “ आत्म ध्यान ” । यह कम्प्यूटर के डिलीट बटन की तरह साधक के मन मानस से गैरजरूरी यादें, संस्मरण, नकारात्मकता डिलीट कर देता है। अंतर्मन शांत, शुद्ध और सात्विक हो जाने से आत्म ध्यान का साधक सकारात्मक सोचने लगता है।
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