आचार्य सम्राट पूज्य आनन्द ऋषि जी म.सा. की जन्म जयंती पर विशेष उद्बोधन सच्चे निर्ग्रन्थ थे

5 AUGUST 2024

‘‘आज श्रमण संघीय द्वितीय पट्टधर आचार्य सम्राट आनन्द ऋषिजी महाराज साहब की जन्म जयन्ती देशभर में सामूहिक आयंबिल के रूप मनाई जा रही है, उनका नाम ही ऐसा था जिसमें परम आनन्द, आत्मा का आनन्द, निज का सुख है। जैसे एक संत को निर्ग्रन्थ कहा जाता है जिसके मन में किसी प्रकार की कोई गांठ नहीं होती, जिसका मन एक छोटे बच्चे की तरह सरल, निर्मल, कोमल हृदय होता है उसी तरह आचार्य श्री आनन्द ऋषि जी म.सा. का हृदय था ’’ उपरोक्त विचार सोमवार को आत्म भवन में आचार्य सम्राट डाॅ. शिव मुनि जी म.सा. ने पूज्य आनन्द ऋषि जी म.सा. की जन्म जयंति के अवसर पर फरमाये।

उन्होंने संस्मरणों की चर्चा करते हुए आगे फरमाया कि आचार्य श्री आनन्द ऋषि जी महाराज ने संपूर्ण भारतवर्ष में भ्रमण करते हुए समाज को नया चिन्तन मार्गदर्शन प्रदान किया था। उनका समस्त जीवन लोकहित साधना एवं मानवता के लिए था, वे बहुत कम बोलते और शांति से सबकी बात सुनते थे। उनका जीवन आकाश की भांति स्वच्छ निर्मल था। कठिन से कठिन परिस्थिति आई हो परंतु उनका स्वभाव छुटा नहीं। मैंने दीक्षा से पूर्व उनके उत्तर भारत विचरण में दर्शन लाभ लिया तथा दीक्षा के बाद अनेकों बार उनके चरणों में रहने का सौभाग्य प्राप्त किया।

उन्होंने आगे यह भी फरमाया कि कर्मों के प्रभाव से जीवन में सुखःदुःख आते रहते हैं, भगवान राम का राजतिलक हो रहा था उन्हें भी 14 वर्ष वनवास जाना पड़ा, भगवान कृष्ण को भी द्वारका नगरी से जाते समय पानी तक नहीं मिला, भगवान महावीर राजकुमार थे चंडकोशिक सर्प ने डंसा, उनके कानों में कीलों से छेद तक किया तो भी वे अपने स्वभाव में रहे, विचलित नहीं हुए। यदि व्यक्ति जड़ और जीव के भेद को जान लेता है तो उन्हें दुःख का अनुभव नहीं होता।

उन्होंने आगे फरमाया कि आगामी 21 अगस्त से लगने वाले ऑनलाइन आत्म ध्यान धर्म यज्ञ में कोई भी साधक भाग लेकर इस शरीर और आत्मा के भेद को जानने के अवसर का लाभ ले सकता है, जहां शिविर लग रहे हैं वहां प्रभु की वाणी बरसती है और जीव को जीव में रहने का अवसर मिलता है।

श्रमण संघीय प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी ने अपने उद्बोधन आचार्य सम्राट पूज्य श्री आनन्द ऋषि जी म. सा. के जीवन प्रसंगों के उल्लेख में उनके द्वारा तत्व ज्ञान एवं तिलोक रत्न धार्मिक परीक्षा बाॅर्ड में योगदान एवं उनके अवदानों के बारे में बताया।
इससे पूर्व श्रमण संघीय सहमंत्री युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘जय आनन्द गुरुवर करूणा सागर ज्ञान दिवाकर उपकारी’’ भजन की प्रस्तुति दी।

रविवार को (4 अगस्त) सायं 5 बजे बैंगलोर से वैरागन जीया कोठारी आचार्य श्री जी के दर्शनार्थ उपस्थित हुई, उनका शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से शाॅल, साहित्य, माला द्वारा सम्मान किया। ज्ञातव्य है कि जीया कोठारी (सुपुत्री श्री प्रकाशजी कोठारी) की 7 अक्टूबर, 2024 को भीलवाड़ा में साधुमार्गी आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब के सान्निध्य में दीक्षा होगी। इसी क्रम में रविवार को सायं 5.45 बजे अठाई करने वाले तपस्वियों का गुरु दर्शन हेतु सामूहिक रूप से आगमन हुआ जिसमें अक्षर टाउन, सूरत से सुश्री रिद्धि धोका 9 दिन के उपवास की तपस्या, सुश्री महक धोका ने 8 दिन के उपवास की तपस्या का प्रत्याख्यान किया (सुपुत्री श्री रोहित धोका)। श्रीमती मधु सिंघवी धर्मपत्नी श्री प्रकाश जी सिंघवी ने 6 दिन के उपवास की तपस्या का प्रत्याख्यान किया इनका 8 दिन के उपवास की तपस्या करने का भाव है। तपस्वियों का शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से शाॅल, साहित्य, माला द्वारा सम्मान किया गया

- आचार्य शिवमुनि

For causes
that really matter