आत्म ध्यान द्वारा सिद्धालय का लक्ष्य हो |

3 AUGUST 2024

श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. शिव मुनि जी म.सा. ने आत्म भवन में उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए भगवान महावीर के धर्म के उपदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि धर्म का सार अपने आप को जानने में है। उन्होंने कहा कि जो स्वयं को नहीं जानता, वह कुछ भी नहीं जान सकता। बुद्धि से धर्म को समझना पर्याप्त नहीं है, उसे जीवन में उतारना भी आवश्यक है।

धर्म को जीने का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि “मैं कौन हूं? कहां से आया हूं? कहां जाना है?” ये तीन बातें जीवन में जानना जरूरी है। कषाय (क्रोध, माया, लोभ आदि) का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य ने कई बार जन्म लिया है और केवल अपने व्यक्तित्व को ही पोषण दिया है। यदि मनुष्य का लक्ष्य “सोह्म” अर्थात् “मैं आत्मा हूं” बन जाए और वह आत्मा में अनंत सुख और अनंत ज्ञान को समझ ले तो वह सिद्धालय की ओर अग्रसर हो सकता है।

उन्होंने श्रमण संघीय आचार्य सम्राट पूज्य श्री आत्माराम जी म.सा. द्वारा टीकाकृत श्री आचारांग सूत्र की व्याख्या करते हुए कहा कि आचार्य आत्माराम जी म.सा. जैसे विरले संत हुए जिन्होंने ‘सोहम’ की साधना का रहस्य बताया। उन्होंने कई ग्रंथों और शास्त्रों की रचना की और धर्म उपदेश देकर अच्छे श्रावकों का निर्माण किया। आचार्य श्री आत्माराम जी के ग्रंथों को घर में रखना चाहिए और उनके शास्त्रों को बच्चों को पढ़ने की सीख देनी चाहिए, जिससे बच्चों में अच्छे संस्कारों का निर्माण हो सके।

श्रमण संघीय मंत्री श्री शिरीष मुनि जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कभी-कभी मनुष्य आनंद और शांति में होते हुए भी अचानक ऐसी परिस्थिति में आ जाता है कि वह विभाव में चला जाता है। विभाव के कारण पाप कर्म का बंध हो जाता है, इसलिए आत्म कल्याण के लिए विभाव से बचने का प्रयास करना चाहिए।

युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने “मानव का यह जीवन तू सफल बना लेना” भजन की प्रस्तुति देते हुए आगामी 21 से 24 अगस्त को होने वाले ऑनलाइन शिविर की जानकारी दी।

सुश्री आयुषी जैन ने अठाई के उपवास की तपस्या का प्रत्याख्यान किया और उन्हें शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउंडेशन की ओर से शॉल और प्रशस्ति पत्र द्वारा सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर लुधियाना (पंजाब) से आचार्य श्री जी की संसार पक्षीय बहन प्रवीण-अनील जैन, श्री संजीव जैन, श्री राजन जैन, श्री अरुण जैन आदि एवं बैंगलोर से श्रद्धालुजन उपस्थित हुए।

- आचार्य शिवमुनि

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