समस्या का समाधान संवाद द्वारा हो |

- आचार्य शिवमुनि

17 OCTOBER 2025

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि केशी श्रमण और गौतम स्वामी के संवाद और अष्ट प्रवचन माता दोनों अध्ययनों से उपादेय लेना चाहिए।

उन्होंने आगे फरमाया कि गौतम स्वामी और केशी श्रमण आपस में मिले तो दोनों की वेशभूषा अलग थी, किंतु लक्ष्य दोनों का एक ही है मोक्ष प्राप्त करना। दोनों एक दूसरे से मिलकर अपनी शंकाओं का समाधान करते हैं। गौतम स्वामी को विचार आता है कि केशी श्रमण मुझसे दीक्षा में बड़े हैं मुझे उनके पास जाना चाहिए। दोनों के मिलन से शिष्य और जनता के जो प्रश्न थे वे सब समाधित हो गए। केशी श्रमण के मन में जो संशय थे उन सबका गौतम स्वामी समाधान कर देते हैं। कई जगह साधुओं की वेशभूषा, नियम के लिए आर्त्त-रौद्र ध्यान के पोषण की बात यदा-कदा सुनने को मिलती है। साधुओं की पहचान के लिए अलग-अलग वस्त्र हो सकते हैं, आत्मा का इससे कोई संबंध नहीं है। जहां समस्या है वहीं उसका समाधान भी है जो आपस में मिल-बैठकर, आपसी संवाद कर किया जा सकता है। यदि जीवन में कोई संशय पैदा हो जाए तो अपने माता-पिता, गुरु को बताना चाहिए न कि उसका प्रचार प्रसार करना चाहिए।

उन्होंने ‘अष्ट प्रवचन माता’ का विश्लेषण करते हुए फरमाया कि जिसने एक आत्मा को जीत लिया तो वह सबको जीत लेता है। पांचों इन्द्रियां, छठा मन, चारों कषाय सब पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। यदि एक आत्मा को गौण कर दिया तो चारों कषाय पैदा होंगे, पांचों इन्द्रियां और मन भी हावी होगा, क्योंकि पांचों इन्द्रिया मन को पोषण देती है। मन के अनुकूल नहीं होता है तो कषाय पैदा होते हैं। यदि आत्मा केन्द्र बिन्दू रहेगी तो मन, बुद्धि, इन्द्रियां सब अपने नियंत्रण में रहेगी। एक साधक का मार्ग निवृति का हो प्रवृति का नहीं होना चाहिए। मन का गोपन, वाणी से मौन और यदि बोलना है तो विवेक से बोलना। काया का उपयोग संयम के लिए करना चाहिए।

उन्होंने यह भी फरमाया कि साधु हर वस्तु का प्रतिलेखन करते हैं वैसे ही साधक को ज्यादा परिग्रह नहीं रखना चाहिए। ज्यादा परिग्रह मानसिक रूप से मन और बुद्धि को अनियंत्रित करता है, जिस तरह बेग में अनेक पॉकेट होते हैं तो किसी वस्तु को ढूंढने के लिए सब पॉकेट को टटोलना पड़ता है ढूंढना पड़ता है और मानसिक क्लेश भी बना रहता है। जीवन में ऐसी प्रवृति से बचना चाहिए जिससे कि मानसिक क्लेश हो।

इससे पूर्व युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी एवं प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी ने उन्नतीसवां अध्ययन ‘सम्यक्त्व पराक्रम’ की 74 गाथा का मूल वांचन किया।
प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी ने श्री उत्तराध्ययन सूत्र के 23वें अध्ययन केशी गौतमीय, 24वें अध्ययन ‘प्रवचन माता’ का वर्णन करते हुए रोचक विवेचन किया।

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