श्रावक को अतिचार से बचना चाहिए |

11 AUGUST 2024

श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए अपने उद्बोधन में श्रावक के लिए बंध, वध, छविच्छेद, अतिभार, अन्नपान-निरोध आदि इन पाँच अतिचारों से बचने की प्रेरणा प्रदान की।

उन्होंने अतिचारों की व्याख्या करते हुए फरमाया कि गुस्से में आकर किसी प्राणी को बाँध देना। गाय, भैंस जो कभी दूध नहीं देने पर आवेश में आकर उसे रस्सी से बाँध दिया जाता है। रस्सी से कसकर बाँधना यह बंध अतिचार है। दूसरा अतिचार वध है, जिसमें पशुओं का वध कर चमड़े से बनाई गई वस्तुएं जैसे बेल्ट, पर्स, जूते आदि इन चमड़े से निर्मित वस्तुओं का उपयोग श्रावक को नहीं करना चाहिए। तीसरा छविच्छेद अतिचार है, जिसमें गुस्से में आकर निर्दयतापूर्वक कान, नाक, हाथ, पैर आदि अंग काटना या छेदन करना आता है। घोड़े के पैर के खुर में कील ठोककर नाल लगाना, बैल, भैंस आदि के नाक का छेदन करना। चमड़े की मुलायम वस्तुएं प्राप्त करने के लिए पशुओं के गर्भाशय से भ्रूण को निकालकर उससे मुलायम चमड़े की वस्तुएं प्राप्त करना आदि। चौथा अतिचार अतिभार है – यात्रा करते समय स्वार्थवश कम पैसे देकर किसी कर्मचारी या कुली पर अधिक भार डालना, अर्थात स्वार्थवश दो व्यक्तियों का कार्य एक व्यक्ति से कराना भी अतिभार का दोष लगता है। पाँचवाँ अतिचार अन्नपान-निरोध है, जिसमें गुस्से में आकर भोजन, पानी का त्याग कर देना। एक अच्छे श्रावक को इन पाँच अतिचारों से यथासंभव बचने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने ढंढण मुनि एवं भगवान ऋषभदेव के प्रसंग के माध्यम से उद्बोधन में फरमाया कि किस प्रकार पूर्व जन्मों के कर्मों के दोष से ढंढण मुनि को 6 माह और भगवान ऋषभ को 13 माह तक भोजन नहीं मिला। पूर्व जन्म का कौन सा कर्म उदय में आ जाए, इसलिए श्रावक को आलोचना, प्रतिक्रमण, प्रायश्चित करना चाहिए, जिससे किए हुए पाप कर्मों को नष्ट किया जा सकता है |

श्रमण संघीय प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने नारकी जीवों की वेदना के प्रकारों का वर्णन किया।

श्रमण संघीय सहमंत्री युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘दुनिया के ग़म भुलाएं जीने का क्या सलीका’’ भजन की प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर ‘आत्मार्थी’ श्री शौर्य मुनि जी म.सा. ने 8 दिन के उपवास का पारणा किया।

इस अवसर पर वराछा रोड, सूरत से मिनाक्षी बेन (धर्मपत्नी श्री गोपीलाल दक) ने आज 24 दिन के उपवास कर 25 दिन के उपवास का प्रत्याख्यान किया। इसी क्रम में अहमदनगर (महाराष्ट्र) से श्री आनंद कटारिया ने 23 आयंबिल व 1 दिन के उपवास की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। तपस्वियों का शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउंडेशन की ओर से शॉल, माला, स्मृति चिह्न द्वारा सम्मान कर ‘तपस्या करने वालों को धन्यवाद-धन्यवाद’ के साथ अभिवादन किया।

इस अवसर पर भीम निवासी सूरत प्रवासी श्री शांतिलाल मेहता के पौत्र श्री भावेश मेहता एवं पौत्रवधू दिव्या बेन ने गुरु धारणा ली।
इस अवसर पर सूरत के उपनगर के अलावा अहमदनगर, इंदौर, भीलवाड़ा, महाराष्ट्र आदि स्थानों से श्रावक-श्राविका गुरु दर्शनार्थ उपस्थित हुए।

शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउंडेशन के ट्रस्टी श्री अशोक मेहता ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए बाहर से आए हुए अतिथियों एवं तपस्वियों का आभार प्रकट किया।

- आचार्य शिवमुनि

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