मोह बंधन को तोड़ें |

- आचार्य शिवमुनि

10 SEPTEMBER 2025

आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि मनुष्य में अनंत इच्छाएं कामनाएं होती है कि मुझे धन मिले, हीरे जवाहरात मिले और उस पर अपना अधिकार करता है कि यह मेरा है, इसी तरह अपनी आत्मा पर अधिकार करे। भेदज्ञान द्वारा अंतःकरण से स्वीकार करे कि मैं तो मात्र एक जीवात्मा हूं। पुद्गलों के मध्य रहते हुए उसके प्रति आसक्ति नहीं होनी चाहिए। जो संसाधन है वह केवल जीवन चलाने के लिए उपयोग में लेने है। वस्तुओं के प्रति अधिक आसक्ति होती है तो कर्म बंधन के साथ दुःख कारण बनती है।

धर्म क्या है? धर्म किसे मानना चाहिए? प्रश्न का समाधान करते हुए आचार्य श्री जी ने फरमाया कि व्यवहार धर्म वह है जो परिवार में रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं उससे पुण्य प्राप्त हो सकता है। व्यवहार धर्म के साथ अनंत काल से जो मिथ्यात्व है, आसक्ति, मोह का बंधन है उसे तोड़ना है। जैसे एक तोते को पिंजरे में बंद कर दिया उसके पिंजरे में खाने-पीने की सारी वस्तुएं उस पिंजरे में है लेकिन वह उससे खुश नहीं है वह खुले आकाश में उड़ना चाहता है, इसी तरह बंधन से मुक्त होने के लिए आत्मा की साधना ही श्रेष्ठ है।

प्रमुखमंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उदबोधन में फरमाया कि आत्म ध्यान धर्म यज्ञ का आज चतुर्थ दिवस है जो चार दिन के लिए आए हैं उनके लिए यह अंतिम दिन होगा। यह शिविर आत्मा की दृष्टि को बदलने का है। मिथ्यात्व में चौबीस घंटे में कर्म बंध रहे थे उनको कैसे रोकना इसकी कला सीखी है। मिथ्या दृष्टि कर्म का बंधन करती है। जो दृष्टि शरीर पर थी वह दृष्टि जीव पर ले आना हैं अंततः जीव को जीव में स्थित करना है यह प्रयोग शिविरार्थियों को कराये हैं और करा रहे हैं। शिविर में दृष्टि परिवर्तन किया जाता है।

युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘आनन्द ही आनन्द मिलता है आत्म का ध्यान लगाने से’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुत किया।

आज चैन्नई, सवाई माधोपुर से श्रद्धालु गुरु दर्शन हेतु उपस्थित हुए।

विशेष – श्री ऑल इण्डिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस आत्म ध्यान प्रसार योजना के तहत जैनाचार्यजी यू-ट्यूब चैनल पर दिनांक 16 सितम्बर 2025 को प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक 3 घंटे ऑनलाईन आत्म ध्यान साधना शिविर का आयोजन होगा। आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के 84वें प्रकाशोत्सव पर दिनांक 18 सितम्बर 2025 को श्री ऑल इण्डिया श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन कॉन्फ्रेंस राष्ट्रीय महिला शाखा नई दिल्ली द्वारा 84 हजार एकासन के संकल्प पत्र तैयार किये गये है। जिसके तहत देशभर के श्रावक-श्राविकाएं एकासन तप द्वारा जन्मोत्सव पर अपनी भेंट अर्पित करेंगे।

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