मोक्ष प्राप्ति के लिए उपयोगी है मानव शरीर |

10 AUGUST 2024

जीव जन्म लेने के बाद जीवन भर जहां रहता है उसके साथ वह संबंध बना लेता हैं, जिससे उसके कर्मों का बंधन होता रहा है और उसे बार-बार जन्म लेना पड़ता है। संसार से मुक्त होने के लिए जड़ और जीव के भेद को जानना आवश्यक है। कर्मों के अनुसार श्रावक-श्राविका, साधु-संतों को जो शरीर मिला है और उसके भीतर आत्म तत्व है वह मुख्य है। इस शरीर के द्वारा आत्म ध्यान साधना कर मनुष्य मोक्ष प्राप्त कर सकता है। मोक्ष प्राप्ति के लिए मानव का शरीर उपयोगी है। उपरोक्त विचार श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डाॅ. शिवमुनि जी म.सा. आत्म भवन में उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

उन्होंने सिकंन्दर के प्रसंग का उल्लेख करते हुए आगे फरमाया कि सिकन्दर के पास बहुत सारा धन एकत्रित होने पर भी वह अपने प्राणों को नहीं बचा सका। अंत समय में वह खाली हाथ गया। मानव का जीवन श्रेष्ठ जीवन है। मनुष्य को अच्छे कर्म करके भूल जाना चाहिए यदि वह किसी को एक हाथ से दान देता है तो दूसरे को हाथ को पता नहीं चलना चाहिए इस प्रकार से वह दान देता है तो वह श्रेष्ठ दान है।

उन्होंने आगे आवश्यक और अनावश्यक हिंसा की चर्चा करते हुए फरमाया कि गृहस्थ खेती करता है खेती करते समय कीड़े-मकोड़े भी मर जाते हैं। रसोई में रोटी बनाते समय कुछ सूक्ष्म जीवों की हिंसा हो जाती है, जिसे वह जानबूझकर नहीं करता किंतु जीवन चलाने के लिए जरूरी है वह करनी पड़ती है, कुछ अनावश्यक हिंसा होती है जैसे किसी वृक्ष की पत्तियों को तोड़ना, किसी जानवर को मारना-पिटना आदि ऐसी अनावश्यक हिंसा से व्यक्ति को बचने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने यह भी फरमाया कि साधु किसी प्रकार की हिंसा नहीं करता वह अपने घर का त्याग कर देता है और अपने आत्म कल्याण के लिए साधना कर वह मोक्ष प्राप्ति के लिए आगे बढ़ता है और अपने जीवन का कल्याण करता है।

श्रमण संघीय प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने संसारी जीवों की चर्चा करते हुए गर्भ से उत्पन्न होने वाले जीवों के प्रकार तथा मच्छर, मेंढ़क जो वातावरण में पुदगलों के एकत्रित होने से उत्पन्न होने वाले सम्मूच्र्छिम जीवों की व्याख्या की।

श्रमण संघीय सहमंत्री युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘जरा सा इतना बता दो भगवन लगन यह कैसी लगा रहे हो’’ भजन की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर ‘आत्मार्थी’ श्री शौर्य मुनि जी म.सा. ने 8 दिन के उपवास की तपस्या का प्रत्याख्यान किया।

इसी क्रम में अक्षर टाउन सूरत से श्रीमती महक जिनेश सिंघवी (पुत्रवधु श्रीमती विमलेश चन्द्रप्रकाश सिंघवी) ने आज 27 दिन के उपवास की तपस्या का प्रत्याख्यान किया, इनका मासखमण (31 दिन) उपवास करने भाव है, महक सिंघवी का शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से शाॅल, माला, स्मृति चिह्न द्वारा सम्मान कर ‘तपस्या करने वालों को धन्यवाद-धन्यवाद’ के साथ अभिवादन किया।

इस अवसर पर इन्दौर से आए श्री नेमीचन्द आंचलिया ने अपनी भावनाएं प्रकट की। इस अवसर पर सिरसा (हरियाणा), पंजाब, दिल्ली, कोलकाता, इन्दौर (मध्यप्रदेश) आदि स्थानों से श्रावक-श्राविका बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

- आचार्य शिवमुनि

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