

आत्मज्ञानी सद्गुरुदेव आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में बुधवार से (20 अगस्त) से पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ होगा। श्री वर्धमान स्थानकवासी श्रमण संघीय परम्परा में संवत्सरी महापर्व से पूर्व केश लूंचन होता है, जो एक तरह से कठिन परीक्षा होती है, जिसमें साधु संत उत्साह व भेद विज्ञान के साथ केश लूंचन करवाते हैं, जिससे अनंत कर्मों की निर्जरा होती है। आचार्य भगवन आदि 10 संतवृंद का उत्साह और भेद ज्ञान की साधना के साथ सोमवार को केश लूंचन हुआ, जिसमें 3 नवदीक्षित मुनियों का प्रथम केश लूंचन हुआ।
आचार्य भगवन ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि केश लूंचन एक तरह से साधु की कठिन परीक्षा होती है किंतु साधु शरीर और आत्मा के भेद ज्ञान को समझ लेते हैं तो शरीर की पीड़ा गौण हो जाती है और आठ गुणों वाली आत्मा प्रमुख हो जाती है। शरीर तो कभी न कभी नष्ट होने वाला होता है किंतु आत्मा अजर-अमर है। जिस तरह से दूध से मक्खन, घी निकाला जाता है उसी तरह शरीर से सार तत्व आत्मा को ग्रहण करना है। कोई भी व्यक्ति इस शरीर की निंदा करे, प्रशंसा करे उससे आत्मा को कोई अन्तर नहीं पड़ता।
प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि जो शिष्य विनयशील है, गुरु इंगित को समझता है, गुरु की सेवा करता है वह पूज्य होता है इसी प्रकार जो पुत्र परिवार में माता-पिता की सेवा करने वाला, उनकी बात को समझने वाला वह विनयशील होता है, विनयशील शिष्य गुरु से ज्ञान प्राप्त करता है और विनयशील पुत्र को माता-पिता संपति देते हैं।
युवामनिषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘दुनिया का बनकर देख लिया अब खुद का बनकर देख जरा’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।
20 अगस्त से बरसेगी अरिहंत प्रभु की वाणी – आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में दिनांक 20 अगस्त से 27 अगस्त 2025 तक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व पर निरंतर ध्यान, नवकार महामंत्र का अखण्ड जाप होगा। पर्युषण पर्व पर प्रतिदिन आत्म ध्यान साधना में अरिहंत प्रभु की वाणी का साक्षात् अनुभव प्राप्त करेंगे। पर्युषण पर्व के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण jainacharyaji यू-ट्यूब चैनल पर होगा जिससे देश-विदेश में घर बैठे श्रद्धालु भी इसका लाभ ले सकेंगे।
भारतीय धर्मों में मोक्ष की अवधारणा पर शोध करते हुए मैंने जाना कि सब धर्मों में कॉमन है – ध्यान । तीस वर्षों की मेरी ध्यान साधना का सार है- “ आत्म ध्यान ” । यह कम्प्यूटर के डिलीट बटन की तरह साधक के मन मानस से गैरजरूरी यादें, संस्मरण, नकारात्मकता डिलीट कर देता है। अंतर्मन शांत, शुद्ध और सात्विक हो जाने से आत्म ध्यान का साधक सकारात्मक सोचने लगता है।
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