प्रत्येक प्राणी में जीव को देखें |

- आचार्य शिवमुनि

18 AUGUST 2025

आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने आज के उद्बोधन में त्रसकाय जीवों का वर्णन करते हुए फरमाया कि त्रसकाय के जीव एक दूसरे से बचने का प्रयास करते हैं जैस चूहा बिल्ली, सर्प आदि हैं कोई भी जीव मरना नहीं चाहता। त्रस काय के जीव एक दूसरे को मारने की चेष्टा करते हैं। अण्डे से उत्पन्न होने वाले जीव जैसे हंस, कबूतर मोर इत्यादि हैं। जरायु से उत्पन्न होने वाले जीव जैसे हाथी, भैंस, गाय आदि है। खाद्य पदार्थों में जैसे दही है वह दोपहर के बाद ज्यादा खट्टा हो जाता है क्योंकि उसमें असंख्य जीव उत्पन्न हो जाते हैं। शरीर के पसीने से उत्पन्न होने वाले जीव जूं होती है। कुछ जीव भूमि को छेदकर भी उत्पन्न होते हैं। नरक के जीव जो कुंभी से मरणांतिक कष्ट पाकर बाहर आते हैं, ये सभी त्रस काय के जीव होते हैं ये जीव एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं किंतु पेड़ आदि वनस्पतिकाय के जीव एक जगह स्थिर रहते हैं।

आचार्य भगवन ने श्री आचारांग सूत्र के अनुसार संसार में परिभ्रमण करने वाले को मंद बुद्धि की उपमा से उपमित बताया है। मंद वह है जिसे जीव और अजीव के भेद का पता नहीं है। जिसे आत्मा का बोध नहीं है वह चाहे कितना ही ज्ञानी हो, वक्ता हो किंतु वह मंद बुद्धि है।

आचार्य भगवन ने फरमाया कि व्यक्ति का सबसे अधिक अपने शरीर के प्रति ममत्व का भाव है, जिसे तोड़ना है और अपनी आत्मा में स्थित होकर खुली आंखों से ध्यान करना है। प्रत्येक प्राणी में जीव को देखें तो आत्मार्थी बन आत्मा का कल्याण कर सकते हैं।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने गुरु के प्रति शिष्य की विनम्रता और अहंकारी शिष्य के वर्णन में फरमाया कि जो शिष्य अहंकारी होती है, अकड़ वाला होता है उसकी बुद्धि गुरु के विपरित होती है। एक वह शिष्य जो स्वयं दुःखी होता है और गुरु को अप्रसन्न करता है और फिर काम भी करता है तो वह भीतर से कभी प्रसन्न व सुखी नहीं हो सकता। एक शिष्य वह है जो विनय भाव के साथ प्रसन्नता से गुरु को प्रसन्न रखते हुए कार्य करता है तो वह सुखी होता है। धर्म का मूल विनय है। विनय व्यक्ति को मोक्ष तक ले जाने वाला है।

युवामनिषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘‘धीरे-धीरे मोड़ तू इस मन को’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।

पर्युषण महापर्व 20 अगस्त से – आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में दिनांक 20 अगस्त से 27 अगस्त 2025 तक पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व पर निरंतर ध्यान, नवकार महामंत्र का अखण्ड जाप होगा। इस अवसर पर बाहर से भी अनेक श्रावक-श्राविकाएं इस महापर्व पर उपस्थित होकर धर्माराधना कर अपने कर्मों को हल्का करेंगे।

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