पांच इन्द्रियां और मन के बंधन से मुक्ति के लिए जरूरी है आत्म साधना |

- आचार्य शिवमुनि

15 August 2026

आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने स्वतंत्रता दिवस पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए अपने उद्बोधन में फरमाया कि आज पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। बहुत लंबे संघर्षों के बाद देश को आजादी मिली। देश को पहले मुगल आक्रांताओं ने फिर अंग्रेजों ने लूटा। भारत को सोने की चिड़िया कहते थे, यहां सोने के सिक्के चलते थे। भारत देश का सबसे बडा नालंदा विश्वविद्यालय था जहां विश्वभर के लोग विद्या अध्ययन के लिए आते थे।

इस देश की आजादी में शहीद भगत सिंह, सुभाषचन्द्र बोस जैसे अनेक वीर योद्धाओं ने अपनी कुर्बानी दी। देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर भारतीय सैनिक पहरेदार की भांति डटे हुए हैं तभी हम सुरक्षित इस देश में रह रहे हैं।

उन्होंने आगे फरमाया कि हमें पुद्गल शरीर से मुक्त होने के लिए आत्म ध्यान की साधना करनी चाहिए। पुद्गल जो दिखाई देता है, जो परिवर्तनशील है। आत्म तत्व जो निराकार है उस निराकार आत्म तत्व पर श्रद्धा करते हुए आत्मा में स्थित होने का प्रयास करना है। आत्मा को देख नहीं सकते उसका अनुभव कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी फरमाया कि जहां पुद्गल का चिंतन आए वहां जड़ जीव का भेद करें। पांच इन्द्रियों और मन के बंधन से मुक्त रहने की साधना करें। मन, वाणी और काया का गोपन कर स्वयं में स्थित होने का अभ्यास करेंगे तो शांति को प्राप्त कर सकते हैं।

प्रमुखमंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कर्म बंधन के कारणों पर चर्चा की है। उन्होंने फरमाया कि जिस तरह से गौंद, बैसन के लड्डू होते हैं उनकी अलग-अलग प्रकृति होती है उसी प्रकार कर्मों की प्रकृति होती है। जिस तरह से बाहर की मिट्टी अंदर आती है झाड़ू से तुरंत हट जाती है यदि वहां फर्स पर तेल है तो वह चिपक जाती है उसी प्रकार कर्मों की प्रवृति होती है।

प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी ने म.सा. ने ‘मेरे सतगुरु मुझको देना सहारा, कहीं छूट जाए ना दामन तुम्हारा’’ भजन की प्रस्तुति दी।

आज की सभा में भीलवाड़ा से युवाचार्य श्री महेन्द्रऋषि जी म.सा. के चातुर्मास संयोजक श्री कंवरलाल सूर्या, श्रीमती प्रमिला सूर्या, लंदन से नेत्रा मूथा के अलावा हैदराबाद के श्रद्धालु आचार्य भगवन के दर्शन हेतु उपस्थित हुए।

ऑनलाईन के माध्यम से उपवास, एकासन, आयंबिल का तप करने वाले तपस्वियों ने प्रत्याख्यान लिये।

आत्म भवन में प्रतिदिन प्रातः 6.15 से 7.15 आत्म ध्यान, प्रातः 9.30 से 10.30 स्वाध्याय, ध्यान एवं मंगल पाठ का कार्यक्रम गतिमान है। आप सभी लाभ लेकर अपन जीवन को कृतार्थ करें।

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