ध्यान है स्वयं को जानना |

21 SEPTEMBER 2024

आचार्य सम्राट डाॅ. शिवमुनि जी म.सा. ने ऑनलाइन आत्म ध्यान शिविर के दूसरे दिन उपस्थित धर्म सभा एवं शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए फरमाया कि व्यक्ति नाम, पद, प्रतिष्ठा, परंपरा, संप्रदाय में उलझा रहता है वह केवल जहां संबंधी, मित्र हैं उनसे चर्चा करता है, उनमें रस लेता है, किंतु अनंत सुख व्यक्ति के भीतर है जो आत्म ध्यान के द्वारा जान सकते हैं। स्वयं को जानकर, स्वयं पर श्रद्धा कर जीव का जीव में ठहर जाना तथा ठहरकर शून्य अवस्था को प्राप्त करना ध्यान है। ध्यान निज को जानने से प्रारंभ होता है। ध्यान है देह को अलग कर देना। देह में जो पांचो इन्द्रियां, मन, बुद्धि ने जो कुछ पकड़ कर रखा है उसे छोड़े बिना आगे नहीं बढ़ सकते। जो जड़ व देह के पार जाता है वह ध्यान है।

उन्होंने फरमाया कि ध्यान में काया का चिंतन ही नहीं करना, संघ, समाज, परिवार, मित्र सबको छोड़कर अपने में स्थित होने का प्रयास करो, शरीर का चिंतन करोगे तो सुख नहीं मिलेगा। शरीर के चिंतन से व्यक्ति भूतकाल, भविष्यकाल में चला जाता है। जीव अपने में स्थित हो जाए वह अक्रिय अवस्था होती है। अनंत-अनंत भव में जीव का अपना अस्तित्व है। सिद्धशिला में जाकर भी जीव का अपना अस्तित्व रहता है।

उन्होंने फरमाया कि व्यक्ति को चार गति चैरासी लाख जीवायोनि में अपने कर्म के कारण भ्रमण करना पड़ता है। जीव अपने को भूलकर इस देह को अपना मान लेता है जिससे कर्मों के बंधन की शुरूआत होती है। देह पुद्गल है वह परिवर्तनशील है, जिस तरह से व्यक्ति को रहने के लिए मकान मिल जाता है उसी तरह जीव को पुरुष का, स्त्री का देह रूपी स्थान मिल जाता है, किंतु देह और जीव दोनों को अलग-अलग है।

इससे पूर्व श्रमण संघीय मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने वक्तव्य में फरमाया कि देह है वह जड़ है, सत्य है कि इस देह में जीव है, जीव था, जीव ही रहेगा। सत्य कभी बदलता नहीं है, व्यक्ति की धारणा, संस्कार, वृत्तियां बदलती है लेकिन सत्य शाश्वत है इसलिए सत्य को भगवान कहा है।

प्रवचन प्रभाकर श्री शमित मुनि जी म.सा. ने ‘‘सद्गुरु मुझको देना सहारा, कहीं छूट न जाए दामन’’ भजन की प्रस्तुति दी।

आज की सभा में मासखमण तप करने वाले श्री अनिल मेहता ने आज 31 दिन के उपवास का प्रत्याख्यान किया। मासखमण तप पूर्ण होने के उपलक्ष में शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर पदाधिकारियों द्वारा प्रशस्ति-पत्र, शाॅल एवं माला द्वारा स्वागत सम्मान किया गया। उनकी धर्मपत्नी चन्दा मेहता ने आज 31 एकासन का प्रत्याख्यान लिया।

- आचार्य शिवमुनि

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