

आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. आदि ठाणा साधुवृंद के साथ सोमवार को प्रातः पाण्डेसरा से लगभग 12 किलोमीटर से अधिक का विहार कर सचिन पधारे, सचिन पधारने पर युवक मण्डल, महिला मण्डल, कन्या मण्डल आदि सचिन श्रीसंघ के श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर थी जो उनके चेहरे से साफ झलक रही थी।
सचिन के जैन स्थानक में उपस्थित धर्म सभा को अपने संबोधन में आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. ने फरमाया कि आप सभी की भावना उत्तम है, हर व्यक्ति का व्यवसाय, व्यापार कर धन अर्जित करने का लक्ष्य रहता है और एक गृहणी का परिवार की सेवा करने का लक्ष्य रहता है मनुष्य धन भी कमा लेता है, मकान भी बना लेता है यह सब जब तक भीतर जीव तत्व है तब तक वह अपने जीवन में उपयोग लेता है जो अस्थायी है कभी स्थायी नहीं हो सकता, इसलिए जो स्थायी तत्त्व जीव है उसके लिए भी चिंतन करे, और एक लक्ष्य बनाना चाहिए कि मुझे सिद्धशिला जाना है, मैं सिद्धशिला जाने का अधिकारी हूं, इस संकल्प के साथ पुरुषार्थ करे तो वह निश्चित उस दिशा में आगे बढ़ सकता है जो उसका स्थायी घर है।
उन्होंने सचिन के श्रावक-श्राविकाओं को प्रतिदिन सुबह एक घंटे आत्म ध्यान की प्रेरणा प्रदान की। आचार्य भगवन का जहां भी प्रवास हुआ उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को ध्यान की ओर प्रेरित किया।
इससे पूर्व प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने फरमाया कि जिस तरह से किसी तस्वीर के ऊपर पर्दा आ जाता है वह साफ दिखाई नहीं देती है उसी प्रकार जब ज्ञान ऊपर जब मोह कर्म उदय का पर्दा आ जाता है तो अनंत सुख का अनुभव नहीं कर पाता।
इस अवसर पर श्री शाश्वत मुनि जी म.सा., नवदीक्षित श्री शुचित मुनि जी ने भजन प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर चंदन बाला महिला मण्डल सचिन द्वारा आचार्य भगवन के पदार्पण पर सामुहिक रूप से स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
श्रीमती सीमा सहलोत ने ‘‘गुरुवर सा पधारे तो ऐसा लगा वंदन करो बारंबार’’ भजन की प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर सुश्री पूजा पिछोलिया ने सचिन कन्या मण्डल की ओर से अपने वक्तव्य में कहा कि आज हमारे आंगन में सोने का सूरज उगा। कई वर्षों के इंतजार के बाद आचार्य भगवन सचिन पधारे हैं।
श्रुति चपलोत द्वारा आचार्य भगवन के पदार्पण पर स्वागत गीत बनाने पर सचिन कन्या मण्डल की ओर से सुश्री पूजा पिछोलिया ने शॉल द्वारा सम्मान किया।
भारतीय धर्मों में मोक्ष की अवधारणा पर शोध करते हुए मैंने जाना कि सब धर्मों में कॉमन है – ध्यान । तीस वर्षों की मेरी ध्यान साधना का सार है- “ आत्म ध्यान ” । यह कम्प्यूटर के डिलीट बटन की तरह साधक के मन मानस से गैरजरूरी यादें, संस्मरण, नकारात्मकता डिलीट कर देता है। अंतर्मन शांत, शुद्ध और सात्विक हो जाने से आत्म ध्यान का साधक सकारात्मक सोचने लगता है।
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