काया की नश्वरता को समझकर प्रमाद से दूर रहना चाहिए |

- आचार्य शिवमुनि

4 NOVEMBER 2025

आचार्य भगवन ने उपस्थित धर्म सभा को आत्म ध्यान का प्रयोग करवाया।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने धन की दशा के बारे में फरमाया कि मनुष्य धन एकत्रित करता है, एकत्रित करते-करते धन कभी चोरी हो जाता है, कभी नुकसान भी हो जाता है, बुढ़ापे के समय में उस धन को परिवार में बांट लेते हैं। परिवार में बांटते समय भी सामने वाले को वह धन अपने लिए कम ही लगता है, जिससे परिवार में आपसी कलह का वातावरण बन जाता है, जो व्यक्ति को आर्त्त-रौद्र ध्यान की ओर ले जाता है जिससे मूढ़ता आती है, इस प्रकार धन की अंतिम दशा मूढता ही है।

प्रमुख मंत्री श्री जी ने आगे फरमाया कि व्यक्ति अपने पूर्व भव के तप से ही राजा, प्रधानमंत्री, आचार्य, युवाचार्य, मंत्री, महामंत्री बन गए उस पद पर स्थित होकर यदि वह मोह, कषाय, भोग-विलासिता में लिप्त रहते हैं तो वे मरकर नर्क में जाते हैं। किस प्रकार छोटे से मोह में पड़कर वे अपनी गति को खराब कर दुर्गति में चले जाते हैं। जो उच्च पद रहते हुए मोह को त्याग करता है, अनासक्त रहता है वह अपनी गति को सुधार लेता है। काया की नश्वरता को समझकर प्रमाद से दूर रहना चाहिए।

मधुर गायक श्री निशांत मुनि जी म.सा. ने ‘‘मानव चोला यह पाया है, तन मन को जगाने के लिए’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति देते हुए अपना उद्बोधन दिया।
आचार्य भगवन के दर्शनार्थ वैरागी आदि जैन श्रीसंघ के सदस्यों के साथ उपस्थित हुआ। आदि जैन ने अपनी भावना व्यक्त की। ज्ञातव्य है कि वैरागी आदि जैन श्रमण संघीय सलाहकार श्री राम मुनि जी म.सा. ‘निर्भय’ की निश्राय में अध्ययनरत है, जिनकी दीक्षा 1 फरवरी 2026 को मुंबई में होगी। वैरागी आदि जैन का अवध श्री संघ द्वारा सम्मान किया गया।

इस अवसर पर आज तमिलनाडू, ओलपाड, दिल्ली आदि स्थानों से श्रद्धालु दर्शनार्थ पधारे।
विशेष – आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के सान्निध्य में 5 नवम्बर 2025 को सुबह 8.30 से 9.30 एक घंटे चातुर्मासिक पक्खी पर सामूहिक जाप का आयोजन होगा।

आचार्य सम्राट डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. आदि ठाणा-10 चातुर्मास सम्पन्नता के पश्चात् स्थान परिवर्तन हेतु दिनांक 6 नवम्बर 2025, गुरुवार को आत्म भवन से विहार कर अवध संगरीला स्थित श्री तुलसी भाई चपलोत के निवास स्थान बंगला नं. 373 में पधारेंगे।

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