आत्म शुक्ल शिव प्रकाशोत्सव श्रद्धा भक्ति के साथ सम्पन्न देश के कोने-कोने से गुरु दर्शन हेतु आये बड़ी संख्या में श्रद्धालु |

18 SEPTEMBER 2024

श्रमण संघ के चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. का 83वां जन्मोत्सव आज (18 सितम्बर) आत्म शुक्ल शिव प्रकाशोत्सव के रूप में आयोजित हुआ। इस मौके पर देशभर से बड़ी संख्या में जलगांव, उदयपुर, सवाईमाधोपुर, जयपुर, दिल्ली, औरंगाबाद, मंगलदेश (पंजाब) आदि अनेक क्षेत्रों से श्रद्धालु बधाई देने व दर्शन हेतु उपस्थित हुए।

आचार्य सम्राट ने उपस्थित विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि आज का यह पावन दिवस जिसमें मैं तो निमित्त मात्र हूं पूरे भारत वर्ष के लोगों का प्रेम, सद्भावना को मैं देख रहा हूं। इस व्यक्तित्व का कोई मूल्य नहीं है। अनंत बार व्यक्ति ने जन्म लिया है, परंतु उसने कोई लक्ष्य तय नहीं किया कि मुझे कहां जाना है। बचपन से एक प्यास थी कि मुझे महावीर की साधना मिल जाए, इसलिए घर-परिवार छोड़ा दीक्षा ली, डी.लिट की डिग्री ली, किताबें लिखी, चतुर्मास किये जो केवल व्यक्तित्व विकास का पोषण लगा अब व्यक्तित्व से अस्तित्व में आना यह सार्थकता है। जन्म दिन मनाना कोई विशेष बात नहीं होती विशेष बात है जो अटल सत्य है वह है अपनी आत्मा को जानना। जिसको अंदर का बोध मिल जाए, अंदर की दृष्टि मिल जाए। ध्यान शिविर के माध्यम से समझ में आएगा कि कैसे जीव का जीव में स्थिर होता है। भीतर उतरकर जीव का जीव में स्थित हो जाने से ही सिद्ध बुद्ध मुक्त हो सकते हैं। देह का जितना मोह ममत्व होता है उतना ही ज्यादा कर्मों का बंधन होता है।

उन्होंने वीतराग साधिका निशाजी की साधना को उच्च स्तर की साधना बताते हुए फरमाया कि देश-विदेश के लाखों लोग के वीतराग साधिका के निमित से लाभान्वित होकर आत्म कल्याण कर रहे हैं जो अपने आप में एक विशिष्ट बात है।

इससे पूर्व श्रमण संघीय मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा., युवा मनिषी श्री शुभम मुनि जी म.सा., प्रभावी प्रवचनकार श्री शमित मुनि जी म.सा., श्री शाश्वत मुनि जी म.सा., श्री शौय मुनि जी म.सा. आदि ने वक्तव्य एवं भजनों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किये।

आज की सभा में श्री मुन्नालाल जैन, श्री प्रकाश झाम्मड़, श्री धर्मीचन्द चौपड़ा, श्री नरेन्द्र साण्डेवा, श्री मोहनलाल जैन, डॉ. नागेश जैन, श्रीमती पुष्पा गोखरू आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। श्री अनील मेहता ने 28 दिने के उपवास एवं रूचिरा सुराणा ने सिद्धि तप में चार दिन के उपवास का प्रत्याख्यान किया। कार्यक्रम का संचालन श्री अशोक मेहता ने किया।

आज की सभा में वीतराग साधिका निशा जी जैन का श्रमण संघ के पदाधिकारियों द्वारा सम्मान किया गया।

- आचार्य शिवमुनि

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