आत्मा में अनंत शांति, अनंत सुख है |

- आचार्य शिवमुनि

10 AUGUST 2025

आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में फरमाया कि व्यक्ति आत्मा को मन, बुद्धि और इन्द्रियों से जान नहीं सकता है। आत्मा को निर्विचार, निर्विकल्प अवस्था में रहकर आत्म ध्यान के द्वारा जाना सकता है। आत्मा में अनंत शांति, अनंत सुख है। जितनी देर पलक झपकने में समय लगता है उतने समय में आत्मा देवलोक को पार कर सिद्धशिला में जा सकती है। आत्मा के प्रति अटल श्रद्धा होनी चाहिए। कामदेव श्रावक की भांति ऐसी श्रद्धा हो जो हमारे मुक्ति के द्वार खोल दे।

उन्होंने धन का सदुपयोग कर परहितार्थ कार्य करने वाले श्रावक व भामाशाह का उदाहरण देते हुए फरमाया कि व्यक्ति को अपने धन का सदुपयोग करना चाहिए। ऐसे भामाशाह हुए हैं जिन्होंने देश के आपत्तिकाल में अपना पूरा खजाना दे दिया। टोडरमल जैन जैसे जैन श्रावक ने सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्दसिंह के पुत्रों के अंतिम संस्कार के लिए खड़ी सोने की मोहरें जमीन पर बिछाकर जगह खरीदी। उस समय की वह सबसे अधिक कीमती जगह मानी गई है। सरहिंद पंजाब में आज भी उस जगह पर स्मारक बना हुआ है। ऐसे अनेक उदाहरण है कि समय-समय पर अनेक दानवीरों ने अपने देश हित व परहितार्थ धन का सदुपयोग किया।

उन्होंने ध्यान की प्रेरणा प्रदान करते हुए फरमाया कि जैन कॉन्फ्रेन्स की आत्म ध्यान प्रसार योजना के अंतर्गत प्रतिदिन पारस चैनल पर प्रातः 5 बजे से आत्म ध्यान के प्रयोग करवाये जा रहे हैं। आप अपना प्रमाद छोड़कर उस प्रयोग में सहभागी बनेंगे तो निश्चित रूप से आप आत्मा की अनुभूति कर पाएंगे। प्रत्येक घर में एक कमरा ऐसा भी होना चाहिए कि जहां केवल ध्यान किया जा सके, साथ ही अभिभावक अपने बच्चों को उम्र के अनुसार ध्यान करवाने का अभ्यास करवाएं तो बच्चों में अच्छे विचारों के साथ बौद्धिक विकास होगा।

प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा. ने अपने उद्बोधन में बतलाया कि शिष्य गुरु के अनुशासन को स्वीकार कर लेता है तो वह केवल ज्ञान तक पहुंच सकता है। उन्होंने आलोचना प्रायश्चित आदि आभ्यंतर तप को जीवन में महत्त्व देने के लिए सबको प्रेरित किया।

इस अवसर पर वैरागन शीतल सोलंकी आचार्य भगवन के दर्शन हेतु उपस्थित हुई जिनका शिवाचार्य आत्म ध्यान फाउण्डेशन की ओर से शॉल, माला, साहित्य द्वारा सम्मान किया गया। वैरागन बहन की 22 फरवरी 2026 को कमोल, राजस्थान में जैन भागवती दीक्षा संभावित है।

युवा मनीषी श्री शुभम मुनि जी म.सा. ने ‘मेरे सतगुरु मुझको देना सहारा कहीं छूट ना जाए दामन तुम्हारा’’ सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी।

प्रत्यक्ष एवं ऑनलाईन के माध्यम से अपनी धारणाओं के अनुसार तपस्वियों ने उपवास, एकासन, आयंबिल आदि तपस्याओं का प्रत्याख्यान लिया।
आज की धर्म सभा में चैन्नई, मेरठ, लुधियाना, दिल्ली, जम्मू, बोईसर, मुंबई आदि क्षेत्रों से श्रद्धालुगण उपस्थित हुए

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