ध्यान गुरु आचार्य सम्राट परम पूज्य शिवमुनि जी म.सा. ने मुंबई, औरंगाबाद, सूरत आदि जगहों से आए गुरु भक्तों को आत्म ध्यान का प्रयोग करवाते हुए प्रेरणा दी कि पर्युषण पर्व में बजे तक 12 तक प्रतिष्ठान बंद कर अधिक से अधिक ध्यान, मौन, सामायिक, स्वाध्याय करें।
इससे पूर्व श्रमण संघीय प्रमुख मंत्री श्री शिरीष मुनि जी म.सा ने अपने उद्बोधन में फरमाया जीव को मुक्त होने के लिए ज्ञान की आवश्यकता है। व्यक्ति अनादिकाल से अज्ञान के कारण दुःखी। अज्ञान अर्थात् सत्य का बोध नहीं। जहां सुख नहीं वहां सुख ढूंढ रहे थे। जहां सुख मिलने वाला है वहां हमारे पास समय नहीं है। जैसे सूर्य उदय होता है अंधकार अपने आप भाग जाता है इसी तरह जब ज्ञान का प्रकाश जीवन आ जाता है तो दुःख अपने आप भाग जाता।
श्री शिरीष मुनि जी ने फरमाया कि जीव उत्पन्न होता है और वह मृत्यु को प्राप्त होता है। जीव की अनादि काल से यात्रा चल रही इस यात्रा को वीतराग यात्रा कर वह संसार सागर से पार हो सकता है।
आज की सभा में श्री शमित मुनि जी म.सा. ने ‘‘पाया नर तन पाया, पाकर क्या लाभ पाया’’ भजन की प्रस्तुति दी एवं मनुष्य जीवन की कीमत बताते हुए पर्युषण पर्व के आठ दिनों में आठ कर्म को क्षय करने की एवं आठ मद कम करने की प्रेरणा दी।
सूरत से वनिता हितेश कोठारी ने सिद्धितप के अंतर्गत छठे उपवास का प्रत्याख्यान लिया आत्म ध्यान फाउण्डेशन ने शाॅल, माला व स्मृति चिन्ह द्वारा उनका सम्मान किया। इसी क्रम में मासखमण तप करने वाले श्री अनिल मेहता ने 8 दिन के उपवास का प्रत्याख्यान किया,
विशेष: पर्युषण पर्व 1 सितम्बर से
आचार्य सम्राट पूज्य श्री शिव मुनि जी म.सा. आदि ठाणा के सान्निध्य अवध संगरीला में दिनांक 1 सितम्बर से 8 सितम्बर, 2024 तक पर्युषण पर्व कार्यक्रम आयोजित होगा। पर्युषण पर्व के दौरान मुंबई, नाशिक, जलगांव, अहमदनगर, उदयपुर आदि जगहों से श्रावक-श्राविका आकर पर्युषण पर्व की आराधना करेंगे। पर्युषण पर्व आराधना कार्यक्रम में सुबह 6.30 बजे से सायं 5.30 बजे तक चलेगा, जिसमें प्रार्थना, भक्तामर, ध्यान, प्रवचन, सामूहिक नवकार मंत्र का जाप आदि होगा। कार्यक्रम का यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण प्रसारित होगा।
भारतीय धर्मों में मोक्ष की अवधारणा पर शोध करते हुए मैंने जाना कि सब धर्मों में कॉमन है – ध्यान । तीस वर्षों की मेरी ध्यान साधना का सार है- “ आत्म ध्यान ” । यह कम्प्यूटर के डिलीट बटन की तरह साधक के मन मानस से गैरजरूरी यादें, संस्मरण, नकारात्मकता डिलीट कर देता है। अंतर्मन शांत, शुद्ध और सात्विक हो जाने से आत्म ध्यान का साधक सकारात्मक सोचने लगता है।
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