एक दिवसीय शिविर प्रात: 10-00 बजे से प्रारंभ होकर सायं 5-00 बजे सम्पन्न होता है ।

प्रार्थना ध्यान :

एवं पात्र शुद्धि के लिए आसन-प्राणायाम ।

सोहहं ध्यान :

श्वास व सोहहं से चित्त की शुद्धि एवं स्वरुप-बोध की साधना, सत्य की खोज एवं सत्य का बोध, सम्यक्त्व के बीज का वपन- मैं शुद्धात्मा में स्थापित – अहंकार का विलय मैं एवं मेरा: मैं एवं मेरे में अन्तर करते हुए मिथ्यात्व का त्याग एवं चारित्र रूप में आसक्ति का त्याग अनासक्त योगी की भूमिका में मेरे मन का त्याग कर वीतरागता में जीवन व्यतीत करना ।

आलोचना :

इस जीवन एवं पूर्व जन्मों के अनंत कर्मों को क्षय करने की उत्तम विधि-प्रायश्चित्त द्वारा आत्मशुद्धि से समस्त तनावों से मुक्त होकर जीवन में हल्कापन एवं आगे के लिए कर्म बंधन रुक जाते हैं। शुद्ध सामायिक तिक्रमण की विधि का प्रशिक्षण है आत्म-ध्यान बेसिक शिविर ।

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