PARVACHANMALA LUDHIANA 2012

धर्म को अंग संग करने के लिये चातुर्मास एक सुन्दर अवसर है

जैनाचार्य पूज्य श्री शिवमुनि जी महाराज

11 जून 2012 {विजय इन्द्र नगर} जीवन एक पहेली के रूप में हमें प्राप्त हुआ परन्तु हमने इसे संकल्पना का रूप दिया। माया और स्वप्न में हम फंसते चले गये, उसे ही हम सच मानने लग गये, परन्तु जो इन सब बातों में न अटकते हुए जाग गये उनका जीवन भगवत्ता तुल्य है। हमारे भीतर जागने के लिए प्रेम, सौहार्द, करूणा, मैत्री की भावना होना आवश्यक है। मिटने की कला है धर्म। अपने आपको ऐसे मिटाना, जैसे बूॅंद सागर में मिट जाती है। एक बीज अनेकों परिस्थितियों से मिटते हुए अपने आप पत्ते, शाखाएॅं, वृक्ष, फल, फूल का रूप ले लेते हैं। उसी प्रकार एक पक्षी को जन्म धारण करने के लिए अण्डज रूप में आना पडता है। जब बीज मिट जाता है, अपना अस्तित्व खो देता है तब वह वृक्ष का रूप ले लेता है। वृक्ष का रूप ले लेने के अनन्तर वह मुसाफिरों एवं पशु पक्षियों का आश्रय बन जाता है। उपरोक्त बात श्रमणसंघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट् पूज्य श्री शिवमुनि जी महाराज ने श्रद्धालुओं को उद्बोधन देते हुए कही। 

बसन्त जिस भाॅंति अपने आने की सूचना पूर्व ही दे देता है। कोयल मधुर गीत गाती है। वृक्षों पर नव-पल्लव आता है। कलियाॅं फूल खिलते हैं इसी प्रकार हम भी खिलें। हमें खिलने के लिए अपने अस्तित्व को मिटाना परम् आवश्यक है। जिस प्रकार माॅं के पेट में एक बच्चा नौ माह तक रहता है उस समय गर्भ पालन के लिए माॅं उसका कितना ध्यान रखती है, उसी प्रकार हम धर्म में रहते हुए धर्म का पालन करते हुए उनके नियम उपनियमों का भी ध्यान रखें। अपने आपको अगर कुछ प्राप्त करना होगा तो कुछ मिटाना भी आवश्यक है। धर्म को अंग संग करने के लिये चातुर्मास एक सुन्दर अवसर है। इस वर्ष पांच माह का चातुर्मास है। हम सभी इसका पूरा लाभ उठाए।ं

इस अवसर पर श्रमण संघीय मंत्री श्री शिरीष मुनि जी महाराज, सेवाभावी श्री सुयोग्य मुनि जी महाराज, विदुषी महासाध्वी डाॅ. श्री पुनीत ज्योति जी महाराज, डाॅ. श्री मुक्ता जी महाराज ने भी अपने विचार रखते हुए लुधियाना आगमन पर आचार्य श्री जी का स्वागत किया। विजय इन्द्र नगर श्री संघ ने भी आचार्य श्री जी का स्वागत अभिनन्दन किया। 

आचार्य श्री जी प्रतिदिन प्रातः 8ः15 से 9ः30 तक मंगलमय प्रवचन फरमायेंगे। 12 जून को विजय इन्द्र नगर तथा 13 व 14 जून को आत्म नगर में प्रवचन होगें। यह जानकारी आचार्य शिवमुनि चातुर्मास समिति के चेयरमैन श्री विश्व जैन, वरिष्ट उप चेयरमैन श्री महेन्द्र कुमार जैन, कोषाध्यक्ष श्री राजन जैन व संगठन मंत्री श्री संजीव जैन ने दी।

अनमोल है ध्यान साधना

जैनाचार्य पूज्य श्री शिवमुनि जी महाराज

12 जून, 2012: विजय इन्द्र नगर, लुधियाना युग पुरुष, श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट् पूज्य श्री शिवमुनि जी महाराज ने अपने मंगलमय प्रवचन में फरमाया कि- ध्यान साधना टेंशन पीड़ा दुःख राहत की नहीं है यह तो जन्म-मरण के चक्रव्यूह से दूर होने की साधना है। चार गति में अनंतकाल से जीवात्मा भ्रमण कर रही है। यह बोध जिसको हो जाए वह इससे बाहर निकलने का पुरुषार्थ अवश्य करेगा। देह के भीतर है आत्मा, आत्मा के भीतर उसके आठ गुण है और चारों ओर आठ कर्म लगे हुए हैं। आत्मा के गुणों को प्रकट करने के लिए आठ कर्मों को हटाना होगा। आठ कर्मों को हटाने के लिए ध्यान और कायोत्सर्ग एक उŸाम साधन है। जन्म-जन्म से इकट्ठे किए गए संस्कार एक सामायिक-काल के ध्यान में नष्ट हो सकते हैं। हम अपने जीवन में वीतराग-सामायिक, ध्यान साधना, कायोत्सर्ग को महत्व दें। 

24 तीर्थंकर भगवंतों ने ध्यान साधना ही की। धन, पद, यश सब यहीं रह जाएगा साथ जाएगी तो केवल हमारे द्वारा की गई साधना। यह साधना आत्मा से परमात्मा बनने की साधना है। आज तक अनंत-भवों में हम कई बार तीर्थंकर परमात्मा के समवसरण में गए होंगे। कई बार उनकी वाणी सुनी होगी परन्तु उनसा बनने का पुरुषार्थ नहीं किया इसलिए भव-भ्रमण में घूम रहे हैं।

आज तक संसार के लिए चिन्ता की अब धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ो। हम हमेशा यह सोचते हैं कि मेरे बाद मेरे परिवार का क्या होगा ? मेरी धन सम्पत्ति पद प्रतिष्ठा का क्या होगा। आज तक अनेकों लोग अपनी गति बदल चुके। इस जन्म को पूर्ण कर अगले जन्म में देह धारण कर चुके हैं हम उनसे यह प्रेरणा लें कि वो कुछ साथ नहीं ले जा पाएं। धन, पद, प्रतिष्ठा सब यहीं रह जाएगी साथ जाएगी तुम्हारे द्वारा की गई कर्म-निर्जरा साथ जाएगी तुम्हारी ध्यान साधना। अपने जीवन को ज्ञान के प्रकाश से भर दो। साधना से आलोकित कर दो ये साधना अनमोल है इसकी मूल्यता का ज्ञान तभी होगा जब तुम आत्म ध्यान साधना शिविरों से गुजरोगे।

 

आज विजय इन्द्र नगर में ध्यान साधना के ऊपर प्रकाश ड़ालते हुए स्थानीय लोगों को साधना भी करवाई गई। सभी ने वीतराग-सामायिक की साधना सीखी और अपने जीवन को साधना मार्ग पर आगे बढ़ाया। 

आचार्य श्री जी प्रतिदिन प्रातः 8ः15 से 9ः30 तक मंगलमय प्रवचन फरमायेंगे। 13 व 14 जून को आत्म नगर में प्रवचन होगें। 14 जून को संक्रान्ति का पाठ आत्म नगर में सुनाया जयेगा यह जानकारी आचार्य शिवमुनि चातुर्मास समिति के चेयरमैन श्री विश्व जैन, वरिष्ट उप चेयरमैन श्री महेन्द्र कुमार जैन, कोषाध्यक्ष श्री राजन जैन व संगठन मंत्री श्री संजीव जैन ने दी। श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आचार्य सम्राट पूज्य श्री शिवमुनि जी महाराज के सारगर्भित प्रवचन दिशा चैनल पर प्रतिदिन प्रातः 8ः10 से 8ः30 बजे तक प्रसारित हो रहे हैं। दिशा चैनल - डिश टी.वी-757, टाटा स्काई -184  एयरटेल-689, वीडियोकाॅन-685, पर उपलब्ध है।

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