Twenty Four Thirthankaras

Twenty Four Thirthankaras

Time rolls along in eternal cycles of rise and decline. Utsarpini is a "rising" era in which human morale and natural conditions improve over time. At the end of Utsarpini, begins Avasarpini, a "declining" era of the same length, in which human morale and virtues deteriorate. During the middle of every rising and declining era twenty-four souls become Tirthankaras. They are the humans like us who rise to that level. While accumulating different karmas, they also accumulate get a special karma called Tirthankar Nam Karma in the last 3rd of their life by performing one or more of the 20 special austerities. Tirthankar Nam Karma matures in the final life and leads the person to become a Tirthankara. After attaining omniscience, Tirthankara reorganize Jain religion to suit the changing times. Tirthankaras are also called Arihantas, Jinas, Kevalis, and Vitragi. Arihant means "destroyer of inner enemies," Jina means "victor of inner enemies," and vitragi means "one who does not have any more attachment or hatred towards anyone." This means that they are totally detached from worldly aspects.
They have destroyed the four ghati karmas, namely Jnanavarniya Karma, Darshanavarniya Karma, Mohniya Karma, and Antaraya Karma. They are Kevaljnani meaning that they know everything everywhere that happened in the past, that is happening now, and that will happen in the future at the same time. They are also Kevaldarshani, meaning that they can see all that happened in the past, that is happening now, and that will happen in the future all at the same time. They reinstate the fourfold order of sadhus (monks), sadhvis (nuns), shravaks (male householders), and shravikas (female householders).
Jains celebrate five major events in the life of a Tirthankar. They are called Kalyanak (auspicious events). They are:
  • Chyavana Kalyanak - This is the event when the Tirthankar's soul departs from its last life, and is conceived in the mother's womb.
  • Janma Kalyanak - This is the event when the Tirthankar's soul is born.
  • Diksha Kalyanak - This is the event when the Tirthankar's soul gives up all his/her worldly possessions and becames a monk/nun. (Digambar sect does not believe that women can become Tirthankar or be liberated.
  • Kevaljnana Kalyanak - This is event when Tirthankar's soul destroys the four ghati karmas completely and attains the Kevaljnana (absolute knowledge). Celestial angels set Samavsaran for Tirthankars from where he/she delivers the first sermon. This is the most important event for the entire Jain order as the Tirthankar reinstates Jain Sangh and preaches the Jain path of purification and liberation.
  • Nirvana Kalyanak - This event is when a Tirthankar's soul is liberated from this worldly physical existence forever and becomes a Siddha. On this day, the Tirthankar's soul destroys the four aghati karmas completely, and attains salvation, the state of eternal bliss.
There are other significant events also in the final life of a Tirthankars. When a Tirthankar's soul is conceived, his/her mother has fourteen dreams (some texts mention sixteen dreams). A Tirthankaras soul, while even in mother's womb, has three types of knowledge, namely Matijnan, Shrutjnan, and Avadhijnan. One year before the time of renunciation, a group of celestial angels come to pay homage to the future Tirthankar. They remind him/her that the time to renounce the world is arriving. When a Tirthankar renounces the worldly life, he attains Manahparyavjnan, the fourth type of the knowledge, which enables him/her to know people's thoughts.

List of 24 Tirthankars

NAME FATHER MOTHER BIRTH PLACE
 1) Rishabhadev Ji or Adinath Ji  Nabhi  Maru Devi  Ayodhya
 2) Ajitnath Ji  JitSatru  Vijaya  Ayodhya
 3) Sambhavnath Ji  Jitari  Sena  Shravasti
 4) Abhinandan Swami Ji  Samvar  Siddhartha  Ayodhya
 5) Sumatinath Ji  Megharath  Mangla Devi  Ayodhya
 6) Padmaprabha Swami Ji  Shridhar  Susima Devi  Kaushambhi
 7) Suparshvanath Ji  Pratishtha  Prithvi Devi  Varanasi
 8) Chandraprabha Ji  Mahasen  Lakshmana  Chandrapuri
 9) Suvidhinath Ji Pushpadanta  Sugriva  Rama Rani  Kakandi
 10) Shitaltnath Ji  Dradharath  Nanda Rani  Bhadrilpur
 11) Shreyansnath Ji  Vishnu  Vishnu Devi  Simhapuri
 12) Vasupujya Swami Ji  Vasupujya  Jaya Devi  Champapuri
 13) Vimalnath Ji  Krutavarma  Shyama Devi  Kampilyapur
 14) Anantnath Ji  Simhasen  Suyasha  Ayodhya
 15) Dhramnath Ji  Bhanu  Suvrata  Ratnapur
 16) Shantinath Ji  Vishvasen  Achira  Hastinapur
 17) Kunthunath Ji  Surasen  Shree Devi  Hastinapur
 18) Arahnath Ji  Sudarshan  Devi Rani  Hastinapur
 19) Mallinath Ji  Kumbha  Prabhavati  Mithila
 20) Munisuvrat Swami Ji  Sumitra  Padmavati  Rajgruhi
 21) Naminath Ji  Vijay  Vipra  Mithila
 22) Arishtanemi Ji  Samudravijay  Shiva Devi  Dwarka
 23) Parshvanath Ji  Ashvasen  Vama Devi  Varanasi
 24) Mahavir Swami Ji  Siddharatha  Trishala  Kshatriya Kund
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आत्म ज्ञानी सदगुरुदेव युगप्रधान आचार्य सम्राट पूज्य श्री शिवमुनि जी म.सा. वर्षावास हेतु शिवाचार्य समवसरण, अभय प्रशाल, रेसकोर्स रोड़, इंदौर, मध्य प्रदेश मे विराजमान है ।

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दिनांक – 29 सितम्बर 2017, शुक्रवार

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दिनांक – 10 सितम्बर से 17 सितम्बर 2017
रविवार से रविवार


-: ग्यारह दिवसीय आत्म ध्यान साधना शिविर :-

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रविवार से बुधवार



स्थान – शिवाचार्य समवसरण,
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इंदौर, मध्य प्रदेश


आत्म ध्यान साधना शिविर

दिनांक – 23 अगस्त 2017
एक दिवसीय आत्म ध्यान साधना शिविर
दिनांक – 24-25 अगस्त 2017
दो दिवसीय आत्म ध्यान साधना शिविर

स्थान – अदीश्वर धाम, कुप्प कलां


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